ईरान में महंगाई और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को लगातार पांचवें दिन लोग सड़कों पर हैं. इस विरोध-प्रदर्शन में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है. इसे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से एक बार फिर क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल बनता दिख रहा है. ट्रंप ने कहा, 'अगर ईरान शांति से प्रदर्शन करने वालों पर गोली चलाता है और उन्हें बुरी तरह मारता है, जो उनका रिवाज है तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आएगा और आगे बढ़ने के लिए तैयार है. ईरानी अधिकारियों ने भी देश के अंदरूनी मामलों में अमेरिका के दखल के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है.

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अमेरिकी दखल से इलाके में होगी गड़बड़ी: ईरान

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि अमेरिकी दखल से पूरे इलाके में गड़बड़ी होगी और अमेरिकी हितों का नुकसान होगा. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के करीबी सलाहकार अली शमखानी ने ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा को रेड लाइन बताया. इस हफ्ते ईरान के लगभग 21 राज्यों में दर्जनों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए.

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कहां हमला करना है, हमारी सेनाओं को पता है: ईरान

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा, 'ईरान में ट्रांसिएंट एक्सचेंज रेट से प्रभावित लोग हाल ही में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो उनका अधिकार है. इसके अलावा हमने हिंसक दंगों की छिटपुट घटनाएं भी देखी हैं, जिनमें एक पुलिस स्टेशन पर हमले और पुलिस अधिकारियों पर मोलोटोव कॉकटेल फेंकना शामिल है. राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से अमेरिकी सीमाओं के भीतर नेशनल गार्ड की तैनाती को देखते हुए, उन्हें यह अच्छी तरह से पता होना चाहिए कि सार्वजनिक संपत्ति पर आपराधिक हमलों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.'

ईरान के विदेश मंत्री ने ट्रंप के बयान को लापरवाह और खतरनाक बताया. उन्होंने कहा, 'पहले की तरह ईरान के लोग अपने आंतरिक मामलों में किसी भी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेंगे. हमारी सेनाएं तैयार हैं और ईरानी संप्रभुता के किसी भी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें ठीक-ठीक पता है कि कहां हमला करना है.'

ईरान के करीब 21 राज्यों में हिंसक प्रदर्शन

ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी फार्स ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई, पुलिस वालों पर पत्थर फेंके गए और कारों में आग लगा दी गई. कुछ हथियारबंद लोगों ने शहर में हो रहे विरोध प्रदर्शन का फायदा उठाया. पुलिस ने बाद में कुछ लोगों से हथियार जब्त कर लिए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के करीब 21 राज्यों तक यह हिंसक विरोध की आंच पहुंच चुकी है. 

2022 के बाद इसे ईरान में अब तक का सबसे बड़ा विरोध-प्रदर्शन बताया जा रहा है. इस विरोध-प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण आर्थिक संकट है. ईरान में महंगाई की दर 42.2 फीसदी हो गई है. खासतौर से खाद्य पदार्थों की कीमत में 72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.