भारत और पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर के बाद के सीजफायर का क्रेडिट लेने के लिए दुनिया के नेताओं में होड़ लगी है.अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बाद अब क्रेडिट की इस लड़ाई में चीन ने एंट्री ले ली है. हालांकि, भारत ने शुरुआत से ही किसी भी तीसरे पक्ष की ओर से ऐसी किसी भी मध्यस्थता से इनकार किया है, लेकिन जो भी देश सीजफायर में जबरदस्ती अपनी नाक घुसाता है पाकिस्तान उसी के गुण गाने लगता है.
सीजफायर पर चीन के सपोर्ट में उतरा पाकिस्तान
हाल ही में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत-पाकिस्तान और कंबोडिया-थाईलैंड समेत कई तनाव वाले क्षेत्रों में शांति के लिए सुलह कराने का क्रेडिट लिया. भारत ने इसे सिरे से खारिज किया, लेकिन पाकिस्तान फिर से चीन को सपोर्ट में खड़ा हो गया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि वह चीन के रुख का सपोर्ट करते हैं.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'चीन का नेतृत्व लगातार पाकिस्तान के साथ संपर्क में था. 6 मई से 10 मई के दौरान और शायद उससे पहले भी चीन ने भारतीय नेतृत्व के साथ फी संपर्क किया था. चीन की डिप्लोमैटिक बताचीत ने तनाव कम करने और शांति लाने में मदद की थी. मुझे यकीन है कि मध्यस्थता के बारे में चीन का नजरिया सही है.'
भारत-पाक सीजफायर पर चीन का बयान
चीन के विदेशी संबंधों पर सिंपोजियम में बोलते हुए विदेश मंत्री वांग यी ने कहा, 'इस साल स्थानीय लड़ाई और सीमा पार के झगड़े द्वितीय विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद के किसी भी समय से ज्यादा बार भड़के. भू-राजनीतिक उथल-पुथल रही. स्थायी शांति बनाए रखने के लिए, हमने एक उद्देश्य के साथ सही रवैया अपनाया और लक्षणों और असली वजहों, दोनों को सुलझाने पर फोकस किया है.'
उन्होंने आगे कहा, 'हॉटस्पॉट मुद्दों को सुलझाने के इस चीनी तरीके को अपनाते हुए, हमने उत्तरी म्यांमार, ईरानी परमाणु मुद्दे, पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव, फिलिस्तीन और इजरायल के बीच के मुद्दों और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच हालिया झगड़े में बीच-बचाव किया.'
चीन के दावे पर भारत का जवाब
भारत ने चीन के दावे को खारिज करते हुए दो टूक कहा कि सीजफायर के फैसले में कोई तीसरा पक्ष शामिल नहीं था. भारत ने कहा कि पाकिस्तान के साथ सीजफायर पर सहमति दोनों देशों के डीजीएमओ के बीच हुई बातचीत के बाद हुआ.