मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का एक खास ड्रोन चर्चा में है. इस ड्रोन का नाम कर्रार UAV है. यह एक जेट-पावर्ड मल्टी-पर्पस ड्रोन है, जो इंटरसेप्टर, बॉम्बर और सुसाइड ड्रोन तीनों तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी तेज गति और मारक क्षमता के कारण इसे खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिका के सैन्य ठिकानों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है.

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Army technology की रिपोर्ट के मुताबिक कर्रार ड्रोन को 2010 में पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया गया था. इसे ईरान के रक्षा उद्योग की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है. यह ईरान का पहला स्वदेशी जेट इंजन वाला ड्रोन है और देश की एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है. इसकी गति और संचालन क्षमता इसे पारंपरिक प्रोपेलर वाले ड्रोनों से अलग बनाती है और यह दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए मुश्किल लक्ष्य बन जाता है.

कर्रार ड्रोन की तकनीकी क्षमता और फीचर्स

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कर्रार ड्रोन की कई ऐसी तकनीकी खूबियां हैं, जो इसे युद्ध के मैदान में खतरनाक बनाती हैं. इसकी रेंज लगभग 1,000 किलोमीटर बताई जाती है. वन-वे या सुसाइड मिशन में इसकी पहुंच इससे भी ज्यादा हो सकती है. जेट टर्बो इंजन की वजह से यह लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है. यह करीब 250 से 500 किलोग्राम तक हथियार या विस्फोटक ले जा सकता है. इसमें कौसर एंटी-शिप मिसाइल और अजरखश हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल जैसे हथियार लगाए जा सकते हैं. इसे रनवे की जरूरत नहीं होती. इसे रॉकेट बूस्टर के साथ रेल लॉन्चर से उड़ाया जाता है और मिशन पूरा होने के बाद पैराशूट से उतारा जा सकता है.

युद्ध में क्यों माना जाता है खतरनाक

कर्रार ड्रोन कम लागत में ज्यादा मारक क्षमता वाला हथियार है. इसका नया वर्जन मजीद मिसाइल से लैस बताया जाता है, जिससे यह हवा में ही दुश्मन के विमान या ड्रोन को निशाना बना सकता है. इतना ही नहीं, इसकी तेज गति और सुसाइड अटैक मोड इसे कई मामलों में क्रूज मिसाइल जैसा बना देता है. अगर इसे बड़ी संख्या में एक साथ यानी स्वार्म में इस्तेमाल किया जाए तो यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भ्रमित और कमजोर कर सकता है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के बीच कर्रार जैसे ड्रोन ईरान की रक्षा रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. यह भविष्य के युद्धों में ऐसे ड्रोन कम लागत में बड़े सैन्य प्रभाव डाल सकते हैं.