नेपाल के बाद अब ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ Gen-Z का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिल रहा है. बढ़ती महंगाई को लेकर बीते पांच दिनों से जारी Gen-Z के विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है. इसमें कम से कम छह लोग मारे गए.

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ईरान की सेमी-ऑफिशियल फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, गुरुवार (2 जनवरी, 2026) को तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर (185 मील) दक्षिण-पश्चिम में लोरेस्टन प्रांत के अजना शहर में हुए विरोध प्रदर्शनों में कम से कम तीन लोग मारे गए और 17 अन्य घायल हो गए. विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने 'तानाशाह मुर्दाबाद' के नारे लगाए. सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में सड़क पर आगजनी दिखाई दी. इसके साथ ही गोलियों की आवाज सुनाई दी. लोग 'बेशर्म! बेशर्म!' चिल्लाते दिखे.

फार्स न्यूज एजेंसी ने बताया कि तेहरान से लगभग 470 किलोमीटर दक्षिण में चहारमहल और बख्तियारी प्रांत में लॉर्डेगन शहर में विरोध प्रदर्शन के दौरान दो लोग मारे गए. कुछ प्रदर्शनकारियों ने शहर की सरकारी इमारतों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया. Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने उस इलाके के गवर्नर ऑफिस, मस्जिद, मार्टर्स फाउंडेशन, टाउन हॉल और बैंक की बिल्डिंगों पर पत्थर फेंके. पुलिस ने जवाब में आंसू गैस के गोले दागे.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के करीब 21 राज्यों तक यह हिंसक विरोध की आंच पहुंच चुकी है. 2022 के बाद इसे ईरान में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन बताया जा रहा है. इस विरोध प्रदर्शन का सबसे बड़ा कारण आर्थिक संकट है. करेंसी की वैल्यू लगातार गिरती जा रही है. लोगों के पास रोजगार नहीं है, जिसकी वजह से जनता में आक्रोश है.

वैसे तो ईरान में धार्मिक मुद्दों को लेकर कई बार प्रदर्शन देखने को मिला है, लेकिन इस बार यह विरोध ईरान के सुप्रीम लीडर के खिलाफ आर्थिक मुद्दों को लेकर हो रहा है. ईरान में महंगाई की दर 42.2 फीसदी हो गई है. खासतौर से खाद्य पदार्थों की कीमत में 72 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. इससे पहले बुधवार को देशभर में स्कूल, यूनिवर्सिटी और पब्लिक इंस्टीट्यूशन बंद कर दिए गए. अधिकारियों ने अशांति को शांत करने की कोशिश में बैंक हॉलिडे घोषित कर दिया था.

 

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