ईरान में जारी बड़े पैमाने के विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सख्त चेतावनी दी है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान की सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा.
ट्रंप का बयान: अमेरिका ‘पूरी तरह तैयार’डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'हम पूरी तरह तैयार हैं और कार्रवाई के लिए तत्पर हैं.' उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारा गया, तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा.
ईरान में हिंसक झड़पें, 7 लोगों की मौतईरान में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है. ये प्रदर्शन रविवार (28 दिसंबर, 2025) से शुरू हुए थे और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए.
महंगाई और मुद्रा संकट बना विरोध की वजहप्रदर्शन की शुरुआत राजधानी तेहरान से हुई, जहां सरकार द्वारा मुद्रा गिरावट, आर्थिक ठहराव और बढ़ती महंगाई से निपटने के तरीके के खिलाफ व्यवसायी सड़कों पर उतर आए. दिसंबर में ईरान की महंगाई दर बढ़कर 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी.
छात्रों के उतरने से आंदोलन और तेजमंगलवार (30 दिसंबर, 2025) को कम से कम 10 विश्वविद्यालयों के छात्रों के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद आंदोलन और उग्र हो गया. कई बाजार बंद कर दिए गए हैं और सरकार ने ठंड का हवाला देकर छुट्टी घोषित कर दी, जिससे देश का बड़ा हिस्सा ठप हो गया.
कई प्रांतों में फैला विरोधCNN की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 24 घंटों में प्रदर्शन कई प्रांतों तक फैल गए. कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए और सुरक्षा बलों के साथ आमने-सामने की झड़पें हुईं. ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर फेंके और कई वाहनों में आग लगा दी. एजेंसी ने दावा किया कि कुछ सशस्त्र उपद्रवियों ने भीड़ का फायदा उठाया. बाद में सुरक्षाबलों ने कई लोगों से हथियार भी बरामद किए.
राष्ट्रपति पेजेश्कियान का नरम रुखईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के नेतृत्व वाली नागरिक सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की इच्छा दिखाई है. उन्होंने सरकारी टीवी पर प्रसारित एक कार्यक्रम में कहा, 'इस्लामी नजरिए से अगर हम लोगों की रोजी-रोटी की समस्या हल नहीं कर पाए, तो हमें नर्क का सामना करना पड़ेगा.'
प्रतिबंधों से पहले से दबाव में है ईरानी अर्थव्यवस्थाईरान की अर्थव्यवस्था वर्षों से अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण दबाव में है, जो उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हैं. जून में इजरायल के साथ 12 दिन चले संघर्ष ने हालात और बिगाड़ दिए, जिससे सरकारी वित्तीय स्थिति और कमजोर हो गई.