7 मई को पाकिस्तान के समयानुसार रात 12 बजकर 35 मिनट और 22 सेकंड पर आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के हेडक्वार्टर मरकज तैयबा पर भारतीय एयरफोर्स ने स्ट्राइक की थी. भारतीय एयरफोर्स ने ये स्ट्राइक मरकज तैयबा के कांप्लेक्स में बनी तीन इमारतों पर की थी, जिसका इस्तेमाल पिछले 25 सालों से आतंकियों की ट्रेनिंग, उनके रहने के लिए कमरे और हथियारों को रखने के लिए किया जाता था.
भारत की स्ट्राइक में तीनों इमारत, जैसे एक लाल रंग की दो मंजिला इमारत जहां आतंकियों के रहने और हथियार रखने की व्यवस्था थी और दो पीले रंग की इमारत जिसका इस्तेमाल लश्कर के टॉप कमाडरों के रहने और आतंकियों की ट्रेनिंग के लिए किया जाता था, वो 70 फीसदी क्षतिग्रस्त हो गई थी और सिर्फ ढांचा ही बचा था.
फिर से क्षतिग्रस्त हेडक्वार्टर को बनाने का काम शुरू
ऐसे में अब आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा ने अपने हेडक्वार्टर को फिर से बनाने का काम शुरू कर दिया है. क्षतिग्रस्त हेडक्वार्टर को फिर से बनाने के लिए लश्कर ए तैयबा ने 18 अगस्त से जेसीबी के सहारे तीनो इमारतों को ढहाने का काम शुरू किया था, जिसके बाद गुरुवार (4 सितंबर, 2025) को मरकज तैयबा के भीतर भारतीय स्ट्राइक में क्षतिग्रस्त हुई.
पीले रंग की इमारत, जिसका नाम 'उम उल क़ुरा' था, उसे पुनर्निर्माण के लिए जेसीबी की मदद से पूरी तरह से ढहा दिया गया था. इसके अलावा क्षतिग्रस्त लाल रंग की तीन मंजिला इमारत, जहां लश्कर ए तैयबा के आतंकियों के रहने और हथियार रखने की व्यवस्था थी, उसे भी रविवार (07 सितंबर, 2025) को सुबह लश्कर ए तैयबा ने अपनी रिकंस्ट्रक्शन ड्राइव में ढहा दिया है.
1.09 एकड़ का परिसर मलबे में तब्दील
एबीपी न्यूज के पास मौजूद एक्सक्लूसिव वीडियो में ये साफ दिख रहा है कि मरकज तैयबा का पूरा 1.09 एकड़ का ये पूरा परिसर अब मलबे में तब्दील हो चुका है और हर तरफ ढही इमारतों का मलबा पड़ा हुआ है. भारत के साथ 7 मई से 10 मई तक, चार दिन तक चले संघर्ष के दौरान पाकिस्तान की सरकार ने ऐलान किया था कि भारत की स्ट्राइक में क्षतिग्रस्त सभी इमारतों का पुनर्निर्माण पाकिस्तान की सरकार करवाएगी और फिर से निर्माण के लिए पैसे भी देगी.
इसके बाद 18 अगस्त से लश्कर ए तैयबा ने हेडक्वार्टर के पुनर्निर्माण के लिए क्षतिग्रस्त इमारतों को जेसीबी से ध्वस्त करने का काम शुरू हुआ था और 20 अगस्त तक मरकज तैयबा में स्थित 'उम उल क़ुरा' का एक हिस्सा ढहा दिया गया था. अब 7 सितंबर तक ढहाने का काम पूरा हो चुका है.
5 फरवरी तक पुनर्निर्माण की कोशिश
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अगले कुछ ही दिनों में मरकज तैयबा का मलबा हटाने का काम खत्म करके इमारतों को बनाने का काम शुरू किया जाएगा, क्योंकि पाकिस्तान की सरकार और आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा की कोशिश है कि अगले साल 5 फरवरी से पहले उसके ध्वस्त हेडक्वार्टर का एक हिस्सा बनकर तैयार हो जाए.
इससे लश्कर ए तैयबा कश्मीर के जिहाद के लिए मनाए जाने वाला अपना सालाना कार्यक्रम 5 फरवरी 2026 को मरकज तैयबा में अपने टॉप कमांडर्स की मौजूदगी में आयोजित कर पाए. सूत्रों के मुताबिक़, लश्कर-ए-तैयबा के क्षतिग्रस्त मुख्यालय का पुनर्निर्माण कार्य इस समय मरकज तैयबा के संचालक और संगठन के प्रमुख ट्रेनर मौलाना अबू जार और कमांडर यूनुस शाह बुखारी की निगरानी में चल रहा है.
आतंकियों के रहने और ट्रेनिंग की यहां व्यवस्था
7 मई को भारत की स्ट्राइक के बाद लश्कर ए तैयबा के आतंकियों की ट्रेनिंग और ठहरने की अस्थायी व्यवस्था कुछ समय के लिए बहावलपुर स्थित मरकज अक्सा में की गई थी. अब जुलाई से लश्कर ए तैयबा के आतंकियों के रहने और ट्रेनिंग की व्यवस्था कसूर जिले के पतोकी शहर में स्थित लश्कर के तैयबा के मरकज यरमूक में की गई है, जिसकी जिम्मेदारी कमांडर अब्दुल राशिद मोहसिन के पास है.
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