पुरस्कार विजेता कश्मीरी फिल्म निर्माता अराफात शेख को अमेरिका के इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) अधिकारियों ने वॉशिंगटन डलेस इंटरनेशनल एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया. इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और नागरिक अधिकारों के समर्थकों के बीच तीखी बहस और आक्रोश को जन्म दे दिया है.

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कैसे हुई एयरपोर्ट पर कार्रवाई?

यह घटना 24 सितंबर को तब घटी, जब अराफात शेख अपनी साथी लेखिका और फिल्म निर्माता तारा डोराबजी के साथ वॉशिंगटन डीसी में स्थित 'बसबॉयज एंड पोएट्स' में आयोजित 'आर्ट एज़ रेजिस्टेंस' नामक एक विशेष पैनल चर्चा में शामिल होने जा रहे थे.

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जैसे ही शेख फ्लाइट से नीचे उतरे, सादे कपड़ों में आए कई फेडरल एजेंट्स ने उन्हें जेटवे पर ही घेर लिया. उनकी साथी तारा डोराबजी के अनुसार, अधिकारियों ने अपनी कोई यूनिफॉर्म नहीं पहनी थी और न ही कोई गिरफ्तारी या तलाशी वारंट प्रस्तुत किया.

अराफात द्वारा अपने सभी वैध इमिग्रेशन दस्तावेज़ और कानूनी कार्य परमिट दिखाए जाने के बावजूद एजेंट्स उन्हें जेटवे से टरमैक पर ले गए. तारा डोराबजी ने बताया, "अराफात ने मुझे आवाज दी और कहा, 'तारा, ये ICE वाले हैं, ये मुझे लेने आए हैं.'उन्होंने बिना किसी विरोध के शांत रहकर अधिकारियों के निर्देशों का पालन किया."

कानूनी स्थिति और आव्रजन पृष्ठभूमि

अराफात शेख 2019 में जॉर्जिया स्टेट यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फिल्म, मीडिया एंड थिएटर में मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका आए थे. वर्ष 2020 में उन्होंने अमेरिका में राजनीतिक शरण के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था. उनका इमिग्रेशन मामला अभी लंबित है. शरण प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान अमेरिकी आव्रजन नियमों के तहत उन्हें कानूनी रूप से काम करने का अधिकार प्राप्त है.

इस वैध स्थिति के बावजूद ICE अधिकारियों ने बिना कोई स्पष्ट कारण बताए उन्हें हिरासत में लेकर वर्जीनिया स्थित 'कैरोलीन डिटेंशन फैसिलिटी' भेज दिया.

अंतरराष्ट्रीय अभियान और कानूनी लड़ाई

इस अचानक हुई हिरासत के बाद अराफात के दोस्तों, सहकर्मियों और दुनिया भर के सिनेमा और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन अभियान 'फ्री आराफात अभियान' शुरू किया. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य उनके कानूनी बचाव और अदालती प्रक्रिया के खर्चों के लिए $50,000 की धनराशि जुटाना था.

दोस्तों और समर्थकों का कहना है कि एक ऐसा व्यक्ति जिसने अपनी पूरी जिंदगी मानवाधिकारों के उल्लंघन की कहानियों को सामने लाने में बिता दी, उसे खुद उसी तरह की मनमानी प्रक्रियात्मक हिरासत का सामना करना पड़ रहा है.

कोर्ट की प्रक्रिया और रिहाई

वर्जीनिया के इमिग्रेशन जज के समक्ष सुनवाई की प्रक्रिया के बीच, समर्थकों के व्यापक दबाव और कानूनी टीम के प्रयासों के बाद लगभग दो सप्ताह (14 दिन) कस्टडी में रहने के बाद अराफात शेख को बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया है. हालांकि, उनके आव्रजन मामले और रिहाई की कानूनी समीक्षा अदालत में जारी रहेगी.

कौन हैं अराफात शेख?

अराफात शेख (जन्म 1984, श्रीनगर) कश्मीर के प्रसिद्ध लोक गायक स्वर्गीय गुलाम नबी शेख के पुत्र हैं, जिन्हें कश्मीर के 'मेहदी हसन' के रूप में जाना जाता था. उनके पिता जुलाई 2003 में जम्मू से नई दिल्ली की ट्रेन यात्रा के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे.

अराफात ने अपने करियर की शुरुआत रेडियो जॉकी के रूप में की थी और बाद में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा. उनकी पहली फीचर फिल्म 'सैफरॉन किंगडम' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपार ख्याति अर्जित की. इस फिल्म को शिकागो फिल्ममेकर्स अवार्ड्स में 'बेस्ट फीचर फिल्म', वेक फॉरेस्ट फिल्म फेस्टिवल और एलए फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार, टीनेक इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में 'इमर्जिंग फिल्ममेकर एक्टिविस्ट अवार्ड' से सम्मानित किया जा चुका है.