मिस्र ने रविवार (9 फरवरी 2025) को घोषणा की है कि वह 27 फरवरी को वह एक आपातकालीन अरब शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से गाजा पट्टी से फलस्तीनियों को कहीं और बसाने के प्रस्ताव के बाद नए और खतरनाक घटनाक्रम पर चर्चा की जाएगी.

ट्रंप के सुझाव से मिस्र नाराज 

पिछले हफ्ते इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्हाइट हाउस में हुई बैठक में ट्रंप की ओर से दिए गए सुझाव से मिस्र, जॉर्डन और सऊदी अरब सहित अरब जगत नाराज हो गया, जो वाशिंगटन के प्रमुख सहयोगी हैं. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय दोनों ने गाजा में 18 लाख फलस्तीनियों को कहीं और बसाने और अमेरिका की ओर उस क्षेत्र का स्वामित्व लेने के ट्रंप के आह्वान को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप का दावा है कि वे अंततः इसे स्वीकार कर लेंगे.

अरब लीग शिखर सम्मेलन में फलस्तीनी मुद्दे 

मिस्र के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह हाल के दिनों में अरब देशों में उच्चतम स्तर पर हुई वार्ता के बाद काहिरा में अरब लीग शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, जिसमें फलस्तीन राज्य भी शामिल है, जिसने फलस्तीनी मुद्दे के लिए नए और खतरनाक घटनाक्रमों पर चर्चा करने के लिए शिखर सम्मेलन आयोजित करने का अनुरोध किया था.”

क्या था ट्रंप का गाजा प्लान

 इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने मंगलवार (4 फरवरी 2025) को  अपने गाजा प्लान का ऐलान किया था. ट्रंप के इस बयान के बाद उन पर जातीय सफाया करने की योजना बनाने का आरोप लगा. संयुक्त राष्ट्र, मानवाधिकार समूहों और अरब नेताओं ने इसकी निंदा की. ट्रंप ने कहा था, "लड़ाई के अंत में इजरायल गाजा पट्टी को संयुक्त राज्य अमेरिका को सौंप दिया देगा. अमेरिका, दुनिया भर की महान विकास टीमों के साथ मिलकर, यहां धीरे-धीरे, सावधानी से निर्माण शुरू करेगा.

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