चीन के कब्जे वाले तिब्बत क्षेत्र में गुरुवार (22 अक्तूबर) को 7.0 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं. नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार तिब्बत में भारतीय समयानुसार रात लगभग 8:03 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो 173 किमी की गहराई पर था. भूकंप के बाद फिलहाल नुकसान और लोगों के हताहत होने की पूरी जानकारी सामने नहीं आई है. 

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इससे पहले 8 सितंबर को भारत के पड़ोसी मुल्क नेपाल में भूकंप आया था. तिब्बत और नेपाल के आसपास का इलाका भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. इससे पहले 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत की बॉर्डर के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से भीषण बाढ़ आ गई थी. इसमें प्रकृतिक आपदा में घर, सड़कें और पुल बह गए थे. हादसे में कई सैकड़ों लोगों की मौत हुई और कई लोग लापता हो गए थे. इसके बाद से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम चल रहा है.

तिब्बत में 1 साल पहले आया था  7 तीव्रता का भूकंप

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तिब्बत में साल 2025 में रिक्टर पैमाने पर लगभग 7 तीव्रता का भूकंप का झटका आया था, जिसमें करीब 100 लोगों की मौत हो गई थी. इसके अलावा 1,000 घर क्षतिग्रस्त हो गए थे.  इसका केंद्र माउंट एवरेस्ट से लगभग 75 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में और नेपाल के करीब था. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, पिछली एक सदी में प्रभावित हुए इस इलाके में कम से कम 6 तीव्रता वाले 10 भूकंप आ चुके हैं.

तिब्बत क्षेत्र में क्यों आते हैं भूकंप?

तिब्बत क्षेत्र अपनी भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है. ऐसा भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के आपस में टकराने के कारण होता है, जिससे हिमालय का निर्माण हुआ था. ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में कई बार भूकंपीय गतिविधियां हुई हैं, जो इसे भूकंप के नजरिए से सबसे सक्रिय क्षेत्रों में से एक बनाती हैं.