टैरिफ को लेकर मचे बवाल के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अगले महीने मीटिंग हो सकती है. ये मुलाकात हाल ही में तियानजिन में हुए SCO समिट के बाद होने वाली है, जिसकी वजह से इस पर दुनिया भर की नजरें टिकी हुई हैं. हालांकि अब तक इस मीटिंग को लेकर व्हाइट हाउस की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है. 

सूत्रों की मानें तो साउथ कोरिया में APEC शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच मुलाकात संभव है. APEC को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक सहयोग और रणनीतिक नीतियों पर चर्चा का प्रमुख मंच माना जाता है. इस बार APEC की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ट्रंप के टैरिफ की वजह से इसके सदस्य देशों में आक्रोश है. 

टैरिफ को लेकर चीन-अमेरिका के बीच खिंची थीं तलवारें

ट्रंप प्रशासन की चीन विरोधी नीतियां, खासकर टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंध, दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण रही हैं. ट्रंप ने हाल ही में चीन पर रूस और उत्तर कोरिया के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप भी लगाया. ऐसे में ट्रंप और शी की संभावित मुलाक़ात केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि द्विपक्षीय रिश्तों को नया मोड़ देने वाली घटना साबित हो सकती है.

ट्रंप के लिए यह बैठक उनके आलोचकों को जवाब देने का अवसर भी है. रिपब्लिकन पार्टी और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने हाल ही में चीन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग-उन की मेज़बानी को लेकर ट्रंप पर सवाल उठाए थे. अगर APEC में शी जिनपिंग और ट्रंप की बातचीत होती है तो यह अमेरिका-चीन रिश्तों में संभावित सुधार का संकेत भी हो सकता है.

चीन पर अमेरिकी टैरिफ का फैसलाजिनपिंग के साथ संभावित बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वाशिंगटन और बीजिंग ट्रंप के टैरिफ को लेकर आमने-सामने हैं.अमेरिका और चीन के अधिकारी एक व्यापार समझौते पर कई वार्ताओं में शामिल रहे हैं, जिसमें यूरोप में दोनों देशों के शीर्ष आर्थिक सलाहकारों के साथ दो आमने-सामने की बैठकें भी शामिल हैं. ट्रंप ने अप्रैल में चीन के आयात पर 145 प्रतिशत टैरिफ लगाया था और चीन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी वस्तुओं पर 125 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया था. टैरिफ पिछले महीने लागू होने वाले थे, लेकिन, ट्रंप ने कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करके नवंबर तक बढ़ी हुई टैरिफ पर रोक लगा दी.

SCO की मीटिंग में शामिल हुए थे पुतिन-मोदी 

हाल ही में चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग-उन की मौजूदगी ने दुनिया का ध्यान खींचा. चीन की इस रणनीतिक मेज़बानी को ट्रंप ने अमेरिका के खिलाफ साजिश करार दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि "लगता है हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है. हालांकि बाद में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों को मजबूत और दोस्ताना बताते हुए अपनी बात से आंशिक रूप से पीछे हटने की कोशिश की. फिर भी यह स्पष्ट है कि भारत, रूस और उत्तर कोरिया जैसे देशों का इस समय अमेरिका-चीन रिश्तों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव है.

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