ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को कहा कि ईरान ने एक प्रस्तावित समझौते के तहत कभी भी परमाणु हथियार न बनाने या हासिल न करने का वादा किया है, जबकि प्रतिबंधों में ढील कड़ी जांच-पड़ताल और निरीक्षण पर निर्भर करेगी. उन्होंने आगे बताया कि इस समझौते को इजरायल और खाड़ी देशों सहित क्षेत्रीय सहयोगियों का समर्थन हासिल है.

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उन्होंने कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि हमारे सभी सहयोगी इजरायली और खाड़ी गठबंधन भी इसमें शामिल हो जाएंगे. ज़ाहिर है, इसका मतलब यह नहीं है कि वे आत्मरक्षा का अधिकार छोड़ देंगे और अगर ईरानी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो मुझे नहीं लगता कि इजरायली इसका जवाब नहीं देंगे. अधिकारी ने यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते पर ईरान के भीतर भी सहमति है.

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अधिकारी ने कहा, "हम IRGC, कट्टरपंथियों और नागरिक नेतृत्व के बीच इस बात पर आम सहमति देखते हैं कि यह एक अच्छी और स्वीकार्य डील है. इसलिए हमें पूरा भरोसा है कि सिस्टम के भीतर सहमति है. इसका मतलब यह नहीं है कि कुछ असहमति नहीं है, लेकिन हमें लगता है कि असहमति बहुत कम है."

'जब तक अमेरिका को फायदा नहीं, ईरान को भी नहीं'अधिकारी के अनुसार, समझौते को इस तरह से तैयार किया गया है कि ईरान को अपने वादे पूरे करने के बाद ही फ़ायदे मिलें. उन्होंने आगे कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि हमने इस डील को इस तरह से तैयार किया है कि जब तक हमें फ़ायदा नहीं मिलता, तब तक उन्हें भी फ़ायदा नहीं मिलेगा. इसी तरह हम बातचीत के ज़रिए समझौते की राह पर आगे बढ़ेंगे.

परमाणु हथियार से दूर रहेगा ईरानसमझौते की खास बातों पर अधिकारी ने कहा कि ईरान ने परमाणु सामग्री को खत्म करने और परमाणु साइटों को बंद करने का वादा किया है, हालांकि तकनीकी विवरणों पर अभी भी बातचीत चल रही है. अधिकारी ने कहा कि तेहरान ने परमाणु हथियार न बनाने या हासिल न करने का अनिश्चित काल के लिए वादा किया है और समझौते के तहत फ़ायदे तभी मिलेंगे जब सत्यापन की शर्तें पूरी हो जाएंगी. अधिकारी ने आगे कहा कि 60 दिनों की टेक्निकल बातचीत की अवधि तय की गई है और इसे MOU में साफ तौर पर शामिल किया गया है.

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