संयुक्त राज्य अमेरिका के श्रम विभाग ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें एच-1बी वीजा के दुरुपयोग का दुरुपयोग का जिक्र किया गया है. ट्रंप प्रशासन ने इस विज्ञापन के जरिए दावा कर रही है कि विदेशी कर्मचारी अमरिका के लागों का सपना चुरा रहे हैं.
इस वीडियो में पाई-चार्ट ग्राफिक के जरिए एच-1बी वीजा धारकों की सबसे अधिक संख्या वाले देशों की हिस्सेदारी को दर्शाया गया है, जिसमें भारत सबसे अधिक 72 फीसदी दिखाया गया है. इसमें एक ऑडियो के लरिए कहा जा रहा है कि अमेरिकी लोगों से उनके सपने चुरे लिए गए.
अमेरिकी लागों के सपने छीन लिए गए: ट्रंप प्रशासन
अमेरिकी श्रम विभाग की ओर से गुरुवार (30 अक्तूबर 2025) को जारी किए गए वीडियो में कहा गया, "विदेशी कर्मचारियों ने अमेरिका के कई युवाओं के सपने छीन लिए क्योंकि राजनेताओं और नौकरशाहों ने कंपनियों को एच-1बी वीजा का दुरुपयोग करने की अनुमति दी है."
इसमें आगे कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रोजेक्ट फायरवॉल के जरिए कंपनियों को एच-1बी वीजा के दुरुपयोग के लिए जवाबदेह ठहराया जा रहा है और भर्ती प्रक्रिया में अमेरिकियों को प्राथमिकता दी जा रही है. 52 सेकंड का यह वीडियो 'अमेरिकी लोगों के लिए अमेरिकी सपने को फिर से साकार करना' के साथ समाप्त हुआ.
भारत के आंकड़े दिखाकर ट्रंप प्रशासन ने कही ये बात
होमलैंड सिक्योरिटी कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका में सबसे ज्यादा इमिग्रेंट भारत से आए थे, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में कुल गैर-आप्रवासी आबादी का 33 फीसदी था. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 सितंबर को एच-1बी वीजा पर 100,000 डॉलर के भारी शुल्क लगाने की घोषणा की, जो 21 सितंबर से प्रभावी हो गया है.
ट्रंप के इस एक्शन से अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय के बीच खलबली मच गई. व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि यह शुल्क हर साल नहीं, बल्कि एक बार लगेगा. यह भी कहा गया कि शुल्क में बढ़ोतरी का मौजूदा वीजा धारकों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
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