बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू दास की भीड़ ने जिस बर्बरता से हत्या की और पिछले 7-8 महीनों में हिंदुओं पर हो रहे हमलों की वजह से बांग्लादेशी हिंदू बेहद डर में हैं. हर वक्त उनको मौत का खौफ सता रहा है. वहां के एक युवक ने खुद इस डर को बयां किया और उसने अपना नाम और पहचान बताने से भी इनकार कर दिया. उसका कहना है कि अगर उसकी आवाज भी पहचान ली तो वह अगली सुबह शायद न देख पाए.
मोहम्मद यूनुस के राज में कट्टरपंथियों को खुली छूट मिली हुई है, जिसकी वजह से अल्पसंख्यक समुदाय डर में जी रहा है. इंडिया टुडे से बात करते हुए देश के हालातों पर इस बांग्लादेशी हिंदू युवक ने बताया कि अल्पसंख्यक डरे हुए हैं. उसने कहा कि हम जिंदा तो हैं, लेकिन चलती-फिरती लाशों की तरह जी रहे हैं.
बांग्लादेशी युवक ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा कि डर इतना ज्यादा है कि पहचान होने पर उसकी जान जा सकती है. उन्होंने कहा, 'अगर मेरा चेहरा या आवाज पहचान ली गई तो शायद कल सुबह मेरी आखिरी सुबह हो.'
शेख हसीना के तख्तापलट के बाद चर्चा में आए कट्टरपंथी छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में हिंसा फैल गई और दूर दराज के इलाकों में भी चरमपंथी समूहों ने हिंदू घरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया. इस दौरान दीपू दास की हत्या की घटना सामने आई, जिससे पूरा हिंदू समुदाय डर में जी रहा है.
18 दिसंबर को मयमनसिंह शहर में कपड़ों के कारखाने में काम करने वाले दीपू दास की ईशनिंदा के आरोप में हत्या कर दी गई थी. हालांकि, बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन के कपंनी कमांडर मोहम्मद शम्सुज्जमान का कहना है कि अभी तक इस बात के ठोस सबूत नहीं मिले हैं कि उसने ईशनिंदा की. उन्होंने कहा कि कोई ऐसा सबूत नहीं मिला है, जिससे यह कहा जा सके कि दीपू दास ने फेसबुक पर कुछ ऐसा लिखा था, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं.
दीपू दास के परिवार का कहना है कि उनके भाई की हत्या एक साजिश के तहत की गई थी. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के वरिष्ठ सलाहकार ने मंगलवार (23 दिसंबर, 2025) को कहा कि पिछले हफ्ते ईशनिंदा के आरोप में जिस हिंदू मजदूर की हत्या कर दी गई थी, उसके परिवार की जिम्मेदारी सरकार लेगी.
शिक्षा सलाहकार सी आर अबरार ने 25 वर्षीय दीपू दास के शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात की. दीपू दास की 18 दिसंबर को मयमनसिंह में भीड़ ने पीटकर हत्या कर दी थी और उनके शव को आग लगा दी गई थी. अबरार ने कहा, 'सरकार ने दीपू दास के बच्चे, पत्नी और माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी ले ली है.' उन्होंने कपड़ा कारखाने के मजदूर की हत्या को 'एक क्रूर अपराध' बताया.
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