चीन में डेमोग्राफिक संकट और गहरा गया है. साल 1949 में चीन के पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना के बाद से देश में सबसे कम जन्म दर (Birth Rate) दर्ज की गई है. वो भी तब जब सरकार ने परिवार को बढ़ाने के लिए कई तरह की योजनाओं को लागू किया है. 

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इन आंकड़ों ने चीन सरकार की बढ़ाई चिंता

सोमवार को नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स के आंकड़े ने सभी को चौंका दिया है. 2025 में चीन में जन्म दर 1000 लोग पर 5.6 दर्ज की गई है. नवजात शिशुओं की संख्या में 1.62 मिलियन की गिरावट आई है. यह कुल 7.92 मिलियन रह गई है. यह पिछले साल की तुलना में 17%  कम है. यहां कुल आबादी 3.4 मिलियन घटकर 1.405 हो गई है. यह 1960 के बाद सबसे बड़ी गिरावट मानी गई है. 

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शी जिनपिंग की कोशिशों को लगा झटका

इन आंकड़ों ने शी जिनपिंग के प्रजनन अनुकूल समाज बनाने की कोशिशों को झटका दिया है. घटती वर्कफोर्स और तेजी से बूढ़ी होती आबादी लंबे समय की आर्थिक स्थिरता और चीन के पेंशन सिस्टम पर चिंता की लकीरें बढ़ा रही है. 

बीजिंग ने जन्म दर बढ़ाने की नीतियां लागू की हैं. इसमें मैटरनिटी और पैटरनिटी लीव को इजाफा करना. शादी रजिस्ट्रेशन आसान बनाना और फाइनेंशियल मदद देना शामिल हैं. 

तीन साल से कम उम्र के बच्चों को सरकार देती है सब्सिडी

वहां कपल्स को तीन साल से कम उम्र के हर बच्चे के लिए सालाना 500 डॉलर मिलते हैं. गर्भनिरोधक दवाओं और उपकरणों पर 13% वैल्यू-एडेड टैक्स 1 जनवरी, 2026 से फिर से लागू कर दिया गया है. हालांकि वहां के लोगों का मानना है कि सरकार की तरफ से मुहैया करा रही सब्सिडी की राशि बहुत कम है. साथ ही कुछ मुख्य कारण भी हैं. इनमें बच्चे पैदा करने की उम्र में महिलाओं की कम संख्या और घटती शादी के आंकड़े शामिल हैं. इसमें वहां की एक बच्चे की नीति का भी सबसे बड़ा दोष है. हालांकि, इसे 2015 में खत्म कर दिया गया था.