अमेरिका के कई राज्यों में वोटिंग सेंटर खुल गए हैं. अमेरिकी नागरिक मिडटर्म इलेक्शन में वोट डाल रहे हैं. इन चुनावों से तय होगा कि राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के दो सालों में कांग्रेस की संसद पर किसका कंट्रोल होगा. कनेक्टिकट, इंडियाना, केंटकी, मेन, न्यू हैम्पशायर, न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क और वर्जीनिया जैसे राज्यों में भारतीय समयानुसार शाम साढ़े चार बजे से वोटिंग जारी है. 

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ये चुनाव ट्रंप के कार्यकाल पर देशव्यापी जनमत की तरह है. इससे पता चलेगा कि क्या वोटर्स कांग्रेस के एक या दोनों सदनों का कंट्रोल डेमोक्रेट्स को सौंपकर ट्रंप के पावर को सीमित करना चाहते हैं, या फिर वे रिपब्लिकन्स को ही सत्ता में बनाए रखना चाहते हैं.

यह फैसला ऐसे वक्त हो रहा है, जब लोग मंहगाई और ईरान के साथ चल रहे तनाव से चिंता में हैं. इन चुनावों के नतीजें दोनों पार्टियों के भीतर उन नीतियों और संदेशों पर होने वाली बहस को भी दिशा दे सकते हैं. यह 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में वोटर्स को प्रभावित कर सकते हैं. 

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अमेरिका के लिए यह इलेक्शन क्यों जरूरी? 

अमेरिका के ये मिडटर्म इलेक्शन ही तय करते हैं कि कांग्रेस पर किसका कंट्रोल होगा. रिपब्लिकन्स के पास हाउस में 218-214 और सीनेट में 53-47 का मामूली बहुमत है. इसे पलटने के लिए डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में कुल मिलाकर चार सीटों पर बढ़त हासिल करनी होगी. माना जा रहा है कि डेमोक्रेट्स हाउस में फिर से बहुमत हासिल कर सकते हैं. सीनेट की लड़ाई काफी कांटे की है.

डेमोक्रेट्स को कितनी सीटें मिलती है, इसी से तय होगा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के आखिरी सालों में अपने एजेंडे को कितना आगे बढ़ा पाएंगे. अगर डेमोक्रेट्स किसी भी एक सदन में जीत जाते हैं, तो इससे ट्रंप प्रशासन के कामकाज, इमीग्रेशन नीतियों और ईरान के साथ तनाव से निपटने के तरीकों की जांच का रास्ता खुल सकता है.  

अगर रिपब्लिकन्स का प्रदर्शन मजबूत रहता है तो पार्टी पर ट्रंप की पकड़ और मजबूत हो सकती है. वहीं, अगर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है, तो उन पर अपनी अलोकप्रिय नीतियों पर पुनर्विचार करने का प्रेशर बढ़ सकता है. 

चुनाव अधिकारियों की चेतावनी- काउंटिंग में हो सकती है देरी

वोटिंग सेंटर और वोटों की गिनती के दौरान समस्याएं आ सकती है. चुनाव अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कांटे की टक्कर होने पर वोटर्स की पात्रता, वोटों की गिनती और रिजल्ट सार्टिफिकेशन को लेकर विवाद हो सकते हैं. लंबी कतारें, मशीनों में खराबी और राजनीतिक दलों के डेलीगेशन की तरफ से उठाए गए सवाल कानूनी विवाद को जन्म दे सकते हैं. इससे नतीजों में देरी हो सकती है.

जस्टिस डिपार्टमेंट पूरे देश में 1000 चुनाव पर्यवेक्षकों को तैनात करने की योजना बना रहा है. यह संख्या पिछले मिडटर्म चुनावों के मुकाबले तीन गुना है. इधर देखना है कि नतीजों के बाद ट्रंप किस तरह की प्रतिक्रिया देंगे.