लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब समाजवादी पार्टी के लिए माथापच्ची की नई वजह पैदा हो गयी है. पार्टी नवगठित विधानसभा में विपक्ष के नेता के लिये अपने किसी नेता का नाम तय करने को लेकर पसोपेश में है.


47 सीटें जीतकर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी समाजवादी पार्टी


हाल में सम्पन्न विधानसभा चुनाव में एसपी 47 सीटें जीतकर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बनी है और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव को तय करना है कि 403 सदस्यीय विधानसभा में 325 के संख्याबल वाले सत्तापक्ष के सामने विपक्ष का नेता किसे बनाया जाए, जो प्रतिपक्ष की बात को प्रभावशाली तरीके से रख सके.


अखिलेश विधान परिषद के सदस्य हैं और वह इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़े. उन्होंने एसपी के नवनिर्वाचित विधायकों की कल बैठक बुलायी है. माना जा रहा है कि इस बैठक में विधायकों की राय जानने के बाद वह नेता प्रतिपक्ष के सम्बन्ध में कोई फैसला लेंगे.


बांसडीह से विधायक रामगोविन्द चौधरी का भी नाम


हालांकि अखिलेश के पास विकल्प बहुत सीमित हैं. इस पद के लिये सबसे प्रमुख और अनुभवी राजनेताओं में उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शिवपाल सिंह यादव और आजम खां शामिल हैं. हालांकि एक नाम अखिलेश के विश्वासपात्र बलिया के बांसडीह से विधायक रामगोविन्द चौधरी का भी लिया जा रहा है.


विधानसभा चुनाव से कुछ पहले एसपी संस्थापक मुलायम सिंह द्वारा अखिलेश को पार्टी प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाये जाने के बाद परिवार में हुए झगड़े और उसमें अखिलेश की जीत के बाद हाशिये पर पहुंचे शिवपाल को नेता विपक्ष का महत्वपूर्ण पद दिये जाने की सम्भावना बहुत कम है, क्योंकि अखिलेश उन्हें अहमियत नहीं देना चाहेंगे.


एसपी संस्थापक मुलायम सिंह यादव नेता प्रतिपक्ष के पद के लिये शिवपाल के नाम का समर्थन कर सकते हैं लेकिन पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अखिलेश उनकी सलाह मानेंगे, ऐसा सम्भव नहीं लगता.


अखिलेश के विश्वासपात्र हैं रामगोविन्द चौधरी


जहां तक आजम खां की बात है तो उन्हें संसदीय कार्यो और व्यवस्थाओं की गहरी जानकारी है लेकिन एसपी के एक वरिष्ठ नेता ने गोपनीयता की शर्त पर बताया कि खान का अप्रत्याशित रवैया उनके लिये नुकसानदेह हो सकता है. नेता प्रतिपक्ष के सम्भावित चेहरों में बांसडीह से विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री रामगोविन्द चौधरी भी शामिल हैं. वह अखिलेश के विश्वासपात्र हैं और उनकी गिनती एसपी के मुखर और स्पष्टवादी नेताओं में की जाती है.


बहरहाल, नेता प्रतिपक्ष को लेकर बनी संशय की स्थिति कल की बैठक के बाद खत्म हो जाने की उम्मीद जतायी जा रही है. अखिलेश खुद विधान परिषद का सदस्य होने के नाते उच्च सदन में वरिष्ठ नेता अहमद हसन की जगह विपक्ष के नेता की भूमिका में आ सकते हैं. गत 11 मार्च को आये चुनाव परिणामों में पराजय स्वीकार करने के बाद अखिलेश ने वादा किया था कि विपक्ष रचनात्मक भूमिका निभाएगा.