पटना: लोकसभा चुनाव में पार्टी को मिली करारी हार के बाद से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव कम सक्रिय दिखे. विधानसभा के मानसून सत्र में भी तेजस्वी की उपस्थिति न के बराबर रही. इतना ही नहीं इस बीच बिहार में आई बाढ़ को लेकर भी आरजेडी, नीतीश कुमार पर कम हमलावर रही और केंद्र को निशाने पर लिया.

वहीं नीतीश कुमार का आरजेडी के सीनियर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के घर जाकर मिलना और चाय-नाश्ता करना बिहार के सियासी गलियारे में सुर्खियों में रहा. चर्चा तो यहां तक होने लगी कि क्या आरजेडी और जेडीयू एक बार फिर साथ आ सकते हैं?

इन तमाम चर्चाओं के बीच आज तेजस्वी यादव ने महीनों बाद फेसबुक पर अपने ‘दिल की बात’ लिखी. इसमें उन्होंने नीतीश कुमार की सरकार पर निशाना साधा तो वहीं केंद्र पर भी हमला किया. अपने लंबे फेसबुक पोस्ट में तेजस्वी ने बहुत कुछ लिखा लेकिन अंत में उन्होंने सबसे अहम बात लिख डाली. उन्होंने कहा कि बिहार को नई सरकार की जरूरत है. तेजस्वी की इस बात के कई मायने हैं. अगले साल बिहार में विधानसभा चुनाव होने हैं. आरजेडी ये एलान कर चुकी है कि 2020 में राज्य का विधानसभा चुनाव पार्टी तेजस्वी यादव के नेतृत्व में ही लड़ेगी.

हालांकि यह भी दिलचस्प है कि पार्टी के सीनियर नेता रघुवंश प्रसाद सिंह, नीतीश को महागठबंधन में आने का न्यौता दे चुके हैं. एक बार जब उनसे ये सवाल किया गया कि तेजस्वी ने तो महागठबंधन में नीतीश कुमार की एंट्री को बंद कर दी है तो इसपर रघुवंश प्रसाद ने कहा था- क्या तेजस्वी ने लिखकर दिया है?

अब तेजस्वी के नई सरकार की जरूरत वाली बात का क्या सियासी असर होता है इसपर सबकी नजरें रहेंगी. बता दें कि पार्टी के अध्यक्ष लालू यादव जेल में हैं और आरजेडी का नेतृत्व तेजस्वी ही कर रहे हैं. लेकिन लोकसभा चुनाव में उन्हें निराशा हाथ लगी. पार्टी जीरो पर सिमट कर रह गई.

बिहार को एक नई सरकार की जरूरत- तेजस्वी यादव

अपने फेसबुक पोस्ट पर तेजस्वी ने लिखा, ‘’ अगर बिहार में सचमुच 2005 के बाद सुशासन का आगमन हुआ तो नीतीश जी बताएँ कि किस मानक में बिहार आज किस राज्य से आगे है? प्रति व्यक्ति आय, स्वास्थ्य, शिक्षा, जीवन स्तर, रोज़गार, पलायन- किसमें बिहार किस राज्य से आगे है? हर मानक में हर राज्य से पीछे, फिर भी सुशासन? 14 साल के तथाकथित सुशासन और डबल इंजन वाली सरकार के बाद अब तो और भी फ़िसड्डी राज्य हो गया है. बिहार की 60 फ़ीसदी आबादी युवा है. अब बिहार को रूढ़िवादी नहीं बल्कि उनके सपनों और आकांक्षाओं से क़दमताल करने वाली नयी सरकार की ज़रूरत है.’’