पटना: मुजफ्फरपुर शेल्टर हाऊस मामले पर राज्य महिला आयोग अध्यक्ष दिलमणी मिश्रा ने कहा कि घटना के बाद जब हमलोग वहां गए तो देखा कि वहां रहने लायक माहौल नहीं था. वहां हमें कुछ दवाईयां भी मिलीं, जो गलत काम करने में इस्तेमाल किया जाता होगा. रहने की जगह बिल्कुल गोदाम जैसी थी. वहां हवा पानी की कुछ व्यवस्था नहीं थी. पटना में जब हमने लड़कियों से मुलाकात कि तो उनलोगों ने फोटो देखकर एक व्यक्ति को पहचान भी लिया है.
दिलमणी मिश्रा के मुताबिक पीड़िता ने बताया कि खाने के बाद उन्हें नींद की दवा दी जाती थी. फिर सुबह उठने पर उनके पेट और पूरे शरीर में दर्द होने लगता था. उसके बाद दवा खाने पर हमारा दर्द खत्म होता था.
वहीं इस मामले पर राज्य महिला आयोग की सदस्य उषा विद्यार्थी ने कहा, ''घटना के दो तीन महीने पहले जब मैं वहां गई और सीढ़ी चढ़ रही थी तो वह जेल की तरह लग रहा था. ऐसी घटना का अंदाजा नहीं था. वहां जाकर लड़कियों से मिलने पर वे पैर पकड़ कर रोने लगीं. उनलोगों ने कहा मैडम हमलोगों को यहां से बाहर करा दिजीए. मैंने पूछा कि तुम लोगों का घर कहा है तो लड़कियों ने अपना पता भी बताया. कर्मचारियों से जब पते के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि पता गलत है. तब मैंने वहां के रजिस्टर में लिखा कि व्यवस्था अच्छी की जाए.'' उषा विद्यार्थी ने बताया, ''घटना के बाद गार्डिनर रोड में मिली तो बच्चियों ने बताया कि मूंछ वाले अंकल आते थे. हमलोगों ने तय किया कि टीम बनाकर लड़कियों से मिलने फिर जाएंगे. जब हमलोग गए तो सहरसा में भी ऐसी ही स्थिति थी. वहां एक भी महिला कर्मचारी नहीं थी. लड़कियों को खाना खाने के लिए एक किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है. मुझे लगता है कि वहां भी जांच करने पर ऐसा ही मामला सामने आएगा.''
