यह मानसून सीजन भारत के लिए विरोधाभासों का सीजन बनकर आया है. एक तरफ देश के कुछ हिस्सों में इतनी बारिश हो रही है कि असम में अब तक 85 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, केरल और राजस्थान जैसे राज्य सूखे की कगार पर खड़े हैं. मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगस्त-सितंबर में भी बारिश सामान्य से कम रहेगी. यानी जिन राज्यों में पानी नहीं बरसा, वहां आने वाले दिनों में भी राहत की उम्मीद कम है. तो आखिर किन राज्यों में बारिश ने पानी नहीं दिया, बाढ़ ने कहां तबाही मचाई और बरसात कितनी जरूरी है...

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भारत में कहां रिमझिम और कहां सूखा?

इस साल मानसून ने दो चेहरे दिखाए हैं. गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा में 29% ज्यादा बारिश हुई. वहीं पूर्व और पूर्वोत्तर में 30% और दक्षिण भारत में 28% कम बारिश हुई. हम बात उन राज्यों की करेंगे, जहां बारिश कम हुई है:

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  • उत्तर प्रदेश: 27% बारिश की कमी, सूखे की चपेट में 28 जिले

यूपी में 1 जून से 31 जुलाई के बीच सिर्फ 261.4 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य 357.6 मिमी होनी चाहिए थी, यानी 27% की कमी. 2025 के बरसात के मौसम में सिर्फ 6% बारिश कम थी. पूर्वी यूपी में तो हालात और भी बुरे हैं. वहां 34% की कमी है. 34 जिले डिफिशिएंट (सामान्य से 20-59% कम) या लार्ज डिफिशिएंट (60-99% कम) कैटेगरी में आ गए हैं. लखनऊ में तो 44% कम बारिश हुई है. वाराणसी में 50% और प्रयागराज में 42% कम. पूरे प्रदेश में 28 जिले सूखे जैसी स्थिति में हैं, जिनमें से 13 गंभीर सूखे की चपेट में हैं.

  • बिहार: 56% कम बारिश, सूखा घोषित करने की मांग

बिहार में भी हालात बेहद गंभीर हैं. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) ने राज्य सरकार से बिहार को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि मानसून सीजन में 56% कम बारिश हुई है. बिहार में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे आधी से भी कम हुई है.

  • केरल: 34% कम बारिश, 2023-24 की डरावनी याद

केरल को आमतौर पर सबसे ज्यादा बारिश वाले राज्यों में गिना जाता है, लेकिन इस बार केरल सूखे की ओर बढ़ रहा है. 1 जून से 31 जुलाई के बीच केरल में सामान्य 1,301.7 मिमी की जगह सिर्फ 853.8 मिमी बारिश हुई, यानी 34% की कमी.

2023-24 में जब एल नीनो एक्टिव था, तब केरल में अगस्त में सिर्फ 86 मिमी बारिश हुई थी, जबकि सामान्य 445.2 मिमी होनी चाहिए थी. इसके बाद केरल ने पहली बार हीटवेव (लू) का सामना किया. इस बार भी वही खतरा मंडरा रहा है.

  • कर्नाटक: 17% कम बारिश, कावेरी का पानी सूखा

कर्नाटक में ओवरऑल 17% कम बारिश हुई है. बेंगलुरु और कावेरी बेसिन के ज्यादातर जिले आते हैं दक्षिण आंतरिक इलाकों में आते हैं. यहां 27% कम बारिश है. बेंगलुरु शहरी, बेंगलुरु ग्रामीण, मांड्या, हसन, कोलार, चिक्काबल्लापुर, बल्लारी और तुमकुर जैसे जिलों में भारी कमी दर्ज की गई है.

राज्य के 14 प्रमुख जलाशयों में सिर्फ 52% पानी भरा है. कावेरी बेसिन में सिर्फ 57%, कृष्णा बेसिन में 64% और हाइडल बेसिन में महज 34% पानी है. पिछले साल की तुलना में कावेरी के चार प्रमुख जलाशयों में 65.3 हजार मिलियन क्यूबिक फीट पानी है, जबकि पिछले साल यह 105.4 tmc था.

  • राजस्थान: 11% कम बारिश, बांधों का पानी घट रहा

राजस्थान में 11% कम बारिश हुई है. 23 जिले सूखे जैसी स्थिति में हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि जवाई और बीसलपुर जैसे बड़े बांधों का पानी बढ़ने की बजाय घट रहा है. यानी बारिश इतनी कम है कि बांध भर नहीं पा रहे.   जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और बीकानेर में अगस्त के दूसरे हफ्ते से पूरी तरह सूखा रहने की आशंका है.

  • पूर्वोत्तर: मेघालय में भी 58% कम बारिश

हैरानी की बात यह है कि मेघालय देश के सबसे ज्यादा बारिश वाले राज्यों में से एक है. फिर भी वहां 58% कम बारिश हुई है.

  • दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर: बड़ा खतरा

IMD के मुताबिक, जून-जुलाई में दक्षिण प्रायद्वीप (तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश) में 23% कम, पूर्व और पूर्वोत्तर में 30% कम बारिश हुई. देश के दो बड़े हिस्सों में भारी कमी है.

देश में कहां बाढ़ से आफत आन पड़ी है?

देश में जहां कुछ राज्यों में पानी नहीं बरसा, वहीं कुछ राज्यों में इतना बरसा कि तबाही मच गई.

  • असम: बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है. अब तक 85 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. 1.78 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं और 7 जिले बाढ़ की चपेट में हैं.
  • ओडिशा: बाढ़ से 8.34 लाख लोग प्रभावित हुए. 20 जिलों में बाढ़ का असर है और 10 जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है.
  • केरल: भारी बारिश और भूस्खलन से 6 लोगों की मौत हुई है. 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.
  • कर्नाटक: शिवमोग्गा जिले में भूस्खलन से एक ही परिवार के 3 सदस्यों (पति, पत्नी और 3 साल का बच्चा) की मौत हो गई. 7 प्रमुख रेल सेवाओं को निलंबित करना पड़ा.

इसके अलावा जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में भी भारी बारिश और बाढ़ से जनजीवन अस्त-व्यस्त है. गुजरात के वलसाड में 24 घंटे में 1,064 मिमी बारिश हुई. यह भारत के इतिहास में तीसरी सबसे बड़ी 24 घंटे की बारिश है.

किन राज्यों में और बिगड़ सकते हैं हालात?

देश के कई बड़े शहर पहले से ही पानी के संकट से जूझ रहे हैं. दिल्ली में पानी की कुल मांग 1,250 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) है, लेकिन आपूर्ति घटकर इसका सिर्फ 70% रह गई है. यानी, रोजाना करीब 375 मिलियन गैलन पानी की कमी हो रही है, जो पूरे शहर की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा है. यह समस्या सिर्फ दिल्ली की नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में फैली हुई है.

CEEW की रिसर्च के मुताबिक, भारत की 15 प्रमुख नदी घाटियों में से 11 में पानी का तनाव है, जहां सालाना पानी की उपलब्धता 1,700 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति से कम है. कृष्णा, कावेरी, मही और तापी जैसी घाटियां तो 1,000 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति की 'पानी की कमी' की सीमा से भी नीचे चली गई हैं. भारत के पास दुनिया के सिर्फ 4% मीठे पानी के संसाधन हैं, जबकि यहां दुनिया की 18% आबादी रहती है. यही असंतुलन हर साल पानी के संकट को और गहरा करता है.

IMD का कहना है कि अगस्त में ज्यादातर राज्यों में सामान्य से कम बारिश होगी. पश्चिमोत्तर, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीप में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है, लेकिन ज्यादातर इलाकों में कमी रहेगी. जिन राज्यों में पहले से ही 27% से 56% तक की कमी है, वहां अगस्त-सितंबर में भी राहत की उम्मीद कम है. केरल के लिए तो IMD ने साफ कहा है, 'अगस्त के पहले हफ्ते के बाद लंबी शुष्क अवधि रहेगी.'

अगर बारिश नहीं हुई, तो कितनी बड़ी होगी किल्लत?

यह सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि मानसून भारत की सालाना बारिश का 70% देता है. अगर यह कमजोर रहा, तो इसके 4 बड़े असर होंगे:

  • भूजल का और गिरना: यूपी, बिहार, राजस्थान, और पंजाब जैसे राज्यों में, जहां भूजल पहले से ही तेजी से घट रहा है, बारिश न होने से यह स्थिति और भी विकराल हो जाएगी. भारत पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े भूजल उपयोगकर्ताओं में से एक है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने 247.2 बिलियन क्यूबिक मीटर भूजल निकाला है, जो इसकी वार्षिक निकाले जाने योग्य क्षमता का 61% है.
  • खाद्य संकट और महंगाई: कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों (धान, मक्का, दलहन, तिलहन) पर होगा. कम पैदावार का मतलब होगा कम आपूर्ति, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतें आसमान छूएंगी और महंगाई बढ़ेगी.
  • अंतर-राज्यीय जल विवाद: जब पानी कम होगा, तो राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ना लाजिमी है. कर्नाटक-तमिलनाडु कावेरी विवाद पहले से ही गरमाया हुआ है और पानी कम होने पर और भड़क सकता है.
  • पीने के पानी का संकट: सबसे बड़ा और सीधा खतरा यही है. दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे महानगरों में पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है. गांवों में तो हालात और भी बदतर हो सकते हैं, जहां लोगों को पानी के लिए दूर-दराज जाना पड़ सकता है.

मौसम विभाग ने अगस्त-सितंबर में बारिश पर क्या कहा?

IMD ने साफ कहा है कि अगस्त में बारिश सामान्य से 94% से कम रहेगी. सितंबर के साथ मिलाकर भी 94% से कम रहने की संभावना है. इसकी सबसे बड़ी वजह एल नीनो है. प्रशांत महासागर के गर्म होने की एक प्राकृतिक घटना, जो भारत में मानसून को कमजोर करती है. IMD के मुताबिक, एल नीनो अगस्त-सितंबर में और मजबूत हो सकता है. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी चेतावनी दी है कि एल नीनो 'सुपर एल नीनो' में बदल सकता है.