नई दिल्ली/अहमदाबाद: गुजरात विधानसभा के दूसरे एवं अंतिम चरण के तहत 14 जिलों की 93 सीटों के लिए गुरुवार सुबह मतदान शुरू हो गया. इस दौरान 851 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. गुजरात का ये विधानसभा चुनाव को मोदी के लिए 'प्रतिष्ठा' और कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए 'अग्निपरीक्षा' के तौर पर देखा जा रहा है. प्रचार के दौरान दोनों पार्टियों ने एक दूसरे पर खूब आरोप-प्रत्यारोप लगाए. यह चुनाव प्रचार मुहिम मोदी और राहुल गांधी के बीच आपसी जंग बन कर उभरा और कई बार निजी भी हो गया. इस चुनाव को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले की परीक्षा माना जा रहा है. आपको यहां बता रहे हैं कि ये चुनाव अहम क्यों हैं-
- इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सामने 22 साल की सत्ता बचाने की चुनौती है.
- पहली बार बिना मोदी के गुजरात में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं.
- इस चुनाव को मोदी सरकार का टेस्ट भी माना जा रहा है क्यों जीएसटी के बाद ये पहला चुनाव है.
- बीजेपी जीती तो 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत होगी
- अगर इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत होती है तो गुजरात की सत्ता से इस पार्टी का वनवास खत्म होगा.
- अगर बीजेपी को हराकर कांग्रेस जीत हासिल करती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए हौसला बढ़ेगा.
- जीत से पार्टी के अध्यक्ष बनने जा रहे राहुल गांधी का कद बढ़ेगा.
बता दें कि बता दें कि 2012 के गुजरात चुनाव में बीजेपी ने 115 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस को 61 सीटें मिली थीं. इस विधानसभा चुनाव के नतीजे 18 दिसंबर को घोषित किये जाएंगे.