तृणमूल कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने बुधवार को पार्टी से और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. इससे पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को एक और झटका लगा है जो राज्य विधानसभा चुनाव में हार के बाद आंतरिक विभाजन से जूझ रही है. बीजेपी में शामिल होने की अटकलों के बीच सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे के लिए ‘निजी और राजनीतिक कारणों’ का हवाला दिया है. वह पहले कांग्रेस में भी और कुछ साल पहले ही कांग्रेस में शामिल हुई थीं.

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TMC राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा

उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की और उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से उनके आवास पर मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद सुष्मिता देव ने कहा कि उन्होंने केवल तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि राज्यसभा से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा, ‘यह मेरा व्यक्तिगत निर्णय है कि मैं किस तरह की राजनीति करना चाहती हूं और मेरा नेता किसे होना चाहिए. मेरे अपने कारण हैं और इसलिए मैंने यह फैसला किया है.’

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कौन हैं सुष्मिता देव?

असम के रसूखदार राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखने वाली सुष्मिता देव के दादा सतिन्द्र मोहन देव स्वतंत्रता सेनानी थे. उन्होंने लंबे समय तक सिलचर म्यूनिसिपैलिटी बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दीं. बाद में वे असम के स्वास्थ्य मंत्री भी बने. सुष्मिता देव के पिता संतोष मोहन देव राजनीति के साथ-साथ खेल की दुनिया में भी सक्रिय थे. उन्होंने सिलचर संसदीय क्षेत्र का रिकॉर्ड 6 बार लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया और केंद्र सरकार में इस्पात मंत्री का पदभार संभाला.  सुष्मिता देव की मां भीतिका देव असम से विधायक चुनी गई थीं.

सुष्मिता देव ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मशहूर मिरांडा हाउस कॉलेज से 1993 में पॉलिटिकल साइंस में डिग्री ली. इसके बाद उन्होंने लंदन की थॉमस वैली यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी की. उन्होंने लंदन के ही किंग्स कॉलेज से कॉर्पोरेट लॉ में मास्टर्स की डिग्री हासिल की. सुष्मिता देव दिल्ली बार काउंसिल की एक रजिस्टर्ड सदस्य हैं.

दिल्ली में पढ़ाई के दौरान ही वे कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) से जुड़ गई थीं और उन्होंने मिरांडा हाउस में छात्र संघ का चुनाव भी लड़ा था. उन्होंने अपने गृह राज्य असम से मुख्यधारा की राजनीति शुरू  की. उन्होंने सिलचर म्यूनिसिपैलिटी से अपने राजनीतिक करियर का आगाज किया, जो असम का दूसरा सबसे बड़ा नगर निकाय है. 

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