भारतीय जनता पार्टी संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव करने में जुटी हुई है. हाल ही में चार राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद सोमवार (1 जून) को बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को बीजेपी का राष्ट्रीय संगठक (वरिष्ठ कार्यकर्ता संपर्क) बनाया गया है. उनका केंद्र दिल्ली रहेगा. अभी तक वह बिहार और झारखंड के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री का दायित्व संभाल रहे थे.

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यूपी,बिहार-झारखंड में संगठन को दी धार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले नागेंद्र नाथ त्रिपाठी भारतीय जनता पार्टी के उन प्रमुख संगठनकर्ताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर संगठन को मजबूत करने का काम किया है. वो भाजपा के बिहार-झारखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले वह करीब आठ वर्षों तक उत्तर प्रदेश भाजपा के संगठन महामंत्री भी रह चुके हैं.

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संघ में लंबे समय तक रहे सक्रिय

उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले (तत्कालीन बस्ती) के बेलौली गांव में किसान परिवार में जन्मे नागेंद्र नाथ त्रिपाठी अपने माता-पिता गिरिजा पति त्रिपाठी और गणेशा देवी की बच्चों में सबसे बड़े हैं. स्कूली शिक्षा के दौरान बस्ती में ही उनका संपर्क राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हुआ. संघ में लंबे समय तक सक्रिय रहने के दौरान उन्होंने प्रचारक के रूप में काम किया और युवाओं के बीच वैचारिक एवं संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूत किया

2011 में बिहार बीजेपी के बने संगठन महामंत्री

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भी उन्होंने जिम्मेदारियां निभाईं, जहां उनकी पहचान एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में बनी. साल 2003 में उन्हें भाजपा उत्तर प्रदेश का संगठन महामंत्री बनाया गया. इस दौरान उन्होंने बूथ स्तर तक संगठन विस्तार, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और चुनावी प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया. उत्तर प्रदेश में लगभग आठ वर्षों तक जिम्मेदारी निभाने के बाद वर्ष 2011 में उन्हें बिहार भाजपा का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया.

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2021 में बिहार-झारखंड के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री बने

अगस्त 2021 में भाजपा नेतृत्व ने उन्हें बिहार और झारखंड का क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नियुक्त किया. यह पद संगठनात्मक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि क्षेत्रीय संगठन महामंत्री पार्टी और संघ के बीच समन्वय के साथ-साथ चुनावी रणनीति और संगठन विस्तार की जिम्मेदारी भी संभालता है. सार्वजनिक मंचों पर उनकी मौजूदगी भले कम दिखती हो, लेकिन संगठनात्मक फैसलों और रणनीतिक बैठकों में उनकी भूमिका बेहद प्रभावशाली मानी जाती है.

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