उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी अपने संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव में जुटी हुई हैं. ऐसे में पार्टी के अंदर कई ऐसे शीर्ष चेहरों को लेकर मंथन किया जा रहा है जिन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती हैं. राज्य के तमाम सियासी, क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को देखते हुए एक सूची तैयार की गई है लेकिन इस पर आखिरी फैसला हाईकमान के पास होगा.
यूपी बीजेपी में आगामी चुनाव को देखते हुए संगठन में बदलाव को लेकर कई चरणों के मंथन के बाद सूची तैयार की गई है. इस सूची को दिल्ली में आलाकमान के पास भेज दिया गया है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महामंत्री इस पर यूपी प्रदेशाध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह के साथ चर्चा करेंगे, जिसके बाद आखिरी फैसला लिया जा सकता है.
बाहरी नेताओं को कम तवज्जो
भारतीय जनता पार्टी संगठन में अपनी पार्टी के ही नेताओं को तवज्जो देगी. इस बार बाहरी दलों से आए नेताओं को आगे नहीं किया जाएगा. ताकि पार्टी के लिए ज़मीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का उत्साह बना रहे और उनका निराशा न हो. भाजपा के संगठन में होने वाले बदलाव को आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
60 फीसद तक बदले जा सकते हैं पदाधिकारी
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो भाजपा यूपी की प्रदेश ईकाई में 60 फीसद तक पदाधिकारियों को बदल सकती है. ऐसे में उन लोगों को आगे बढ़ाया जा सकता है जिनके पास काम को लंबा अनुभव होगा और उनको दिए पदों को समायोजित कर उनके समर्थकों को भी साथ लाया जा सके. राज्य के क्षेत्रीय, समाजिक और जातीय समीकरण का संतुलन भी बनाया जा सके, जिसे पार्टी सपा के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की तोड़ के तौर पर पेश कर सके.
इन तमाम बातों के बीच इस बात को लेकर भी क़यास लगने लगे हैं कि भाजपा पार्टी संगठन के साथ क्या आयोग, निगम, बोर्ड और प्राधिकरणों में रिक्त पड़े पदों को पहले भरेगी या पहले प्रदेश ईकाई के पदाधिकारियों के नामों का ऐलान करेगी.
