पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संविधान दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार और मौजूदा सिस्टम पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि आज देश में लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता खतरे में हैं, और संघीय ढांचा कमजोर किया जा रहा है. ममता ने जोर देते हुए कहा कि ऐसे समय में संविधान की मूल भावना और उसमें लिखे अधिकारों की रक्षा बहुत जरूरी है.

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चुनावी वादों पर सवाल, BJP पर निशानाममता बनर्जी ने कहा कि देश में चुनावों के दौरान बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन परिणाम आते ही वे गायब हो जाते हैं. उन्होंने कहा, 'बिहार में किए गए वादे कहां हैं? चुनाव खत्म हुआ और सब भूल गए. यही देश में चल रहा है.' उन्होंने राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक हस्तियों के गलत संदर्भ देने पर भी आपत्ति जताई. उनकी बातों में नाराजगी साफ झलकी, उन्होंने कहा, अगर कोई जय हिंद, वंदे मातरम या राजा राममोहन राय की छवि को गलत बताएगा तो यह हमारा अपमान है.

सरकारी तंत्र पर आरोपममता ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान देश के कई हिस्सों में दबाव, डर और हिंसा का माहौल होता है. उन्होंने दावा किया कि हमारे पास हर केस का रिकॉर्ड है, किसने आत्महत्या की, कौन ट्रॉमा में मरा. जीवन की कीमत होती है.'

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उन्होंने BJP पर तंज कसा, 'क्या BJP साधु-संत है? लोग कहते हैं कि नौकरी ले लेंगे, जेल भेज देंगे. लोकतंत्र रहेगा, लेकिन आप लोग नहीं रहेंगे.' उन्होंने कहा- जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा.

संविधान को बताया राष्ट्र की रीढ़ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि संविधान भारत की विविधता- भाषा, संस्कृति और समुदायों को जोड़ने वाला दस्तावेज है. उन्होंने कहा, संविधान हमारे राष्ट्र की रीढ़ है. इसके निर्माता चाहते थे कि हमारे अधिकार हमेशा सुरक्षित रहें.' ममता ने संविधान के प्रमुख निर्माता डॉ. बी. आर. आंबेडकर और संविधान सभा में शामिल बंगाल के प्रतिनिधियों को श्रद्धांजलि दी.

संविधान दिवस की अहमियत याद दिलाईममता ने कहा कि संविधान दिवस मनाने की परंपरा मजबूत होनी चाहिए क्योंकि यह हमें देश की मूल सोच- न्याय, समानता, स्वतंत्रता और भाईचारे की याद दिलाता है. भारत में संविधान को 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था और इसके अधिकतर प्रावधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुए, जब देश आधिकारिक रूप से गणतंत्र बना.