ग्वालियर: मध्य प्रदेश के चर्चित व्यापम कांड को उजागर करने वाले ग्वालियर के आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष चतुर्वेदी को सीबीआई कोर्ट ने आज शाम 15 दिन के लिए जेल भेज दिया है. गुरुवार को पुलिस ने आशीष को सीबीआई कोर्ट में पेश किया जहां न्यायाधीश ने आशीष से 200 का मुचलका भरने के लिए कहा. आशीष ने ये मुचलका भरने से इंकार कर दिया.
दरअसल, आशीष ने व्यापम मामले के सरगना राहुल यादव के मामले में गवाही देने से इंकार कर दिया था. इस मामले में करीब 29 लोगों की गवाही हो चुकी है और कई लोगों की गवाही बाक़ी है. आशीष का तर्क था कि पहले और लोगों की गवाही हो जाए तब गवाही दूंगा. आपको बता दें कि कोर्ट ने उनके खिलाफ दो बार गिरफ़्तारी का वॉरंट भी जारी किया था.
गुरुवार को पुलिस आशीष को कोर्ट में पेश करने पहुंची थी. न्यायाधीश ने आशीष से 200 रुपए का मुचलका भरने के लिए कहा कि लेकिन आशीष ने इससे इंकार कर दिया. जिसके बाद न्यायाधीश ने आशीष चतुर्वेदी को उसे 15 दिन के लिए जेल भेजने के आदेश कर दिए. आपको ये भी बता दें कि आशीष की अनेक शिकायतों के बाद ही व्यापम घोटाले की असल तस्वीर सामने आई है.
क्या है व्यापम घोटाला? मध्य प्रदेश के सबसे बड़े व्यापम भर्ती घोटाले से जुड़े 40 से ज्यादा आरोपियों की संदिग्ध मौत हो चुकी है. यही वजह है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हमलावर रही है. व्यापम के तहत सरकारी नौकरियों और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ था.
55 केस, 2,530 आरोपियों और 1,980 गिरफ्तारियों के साथ इसे खूनी घोटाला भी कहा जाने लगा. इस घोटाले से सबसे पहले पर्दा तब उठा जब 7 जुलाई, 2013 को मध्य प्रदेश के इंदौर में पीएमटी की प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र फर्जी नाम पर परीक्षा देते पकड़े गए.
इसके साथ ही पुलिस ने इसके मास्टरमाइंड डॉक्टर जगदीश सागर को गिरफ्तार किया. डॉक्टर जगदीश सागर की गिरफ्तकारी के बाद पता चला कि मध्य प्रदेश का व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम का दफ्तर इस धंधे का अहम अड्डा है.
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