त्रिपुरा में लेफ्ट का किला ध्वस्त कर बीजेपी की जीत का असली नायक है ये RSS का प्रचारक
ABP News Bureau | 03 Mar 2018 12:19 PM (IST)
देश की 67.85 फीसद आबादी पर राज करने वाला एनडीए आज और अधिक शक्ति के साथ आगे बढ़ चला है. देश के सबसे छोटे राज्यों में से एक त्रिपुरा और नागालैंड की ज़मीन पर भी अब एनडीए सरकार बनती नज़र आ रही है.
नई दिल्ली/अगरतला: देश की 67.85 फीसद आबादी पर राज करने वाला एनडीए आज और अधिक शक्ति के साथ आगे बढ़ चला है. देश के सबसे छोटे राज्यों में से एक त्रिपुरा और नागालैंड की ज़मीन पर भी अब एनडीए सरकार बनती नज़र आ रही है. जिस त्रिपुरा में लगभग 25 सालों से एकछत्र राज कर रही लेफ्ट सरकार को हिलाने के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था. उसे उसी के गढ़ में बीजेपी ने धूल चटा दी है. इस जीत के लिए संगठन से लेकर तमाम बड़े नेताओं को जीत का श्रेय दिया जा रहा है. लेकिन पीएम नरेन्द्र मोदी के भरोसे और अमित शाह की रणनीति के बल पर जिस एक आदमी को ये ज़िम्मेदारी दी गई और पार्टी प्रभारी बनाया गया. वो कोई और नहीं बल्कि संघ के भरोसेमंद सुनील देवधर थे. सुनील देवधर ने कैसे पलटी काया: त्रिपुरा में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत का फूल खिलाने वाले सुनील देवधर ने अपनी पार्टी और कार्यकर्ताओं के लिए संजीवनी का काम किया और लगभग तीन सालों में ग्राउंड वर्क कर माणिक सरकार के चक्रव्यूह को तोड़ कर रख दिया. 2013 के चुनावों में 50 सीटों में से 49 सीटों पर जमानत तक जब्त करवाने वाली बीजेपी आज करीब 40 सीटें जीतती नज़र आ रही है. इसके पीछे बीजेपी के जो करिश्माई पुरूष हैं वो कोई और नहीं बल्कि पीएम मोदी, अमित शाह और संघ के सबसे विश्वसनीय पदाधिकारी सुनील देवधर ही हैं. सुनील देवधर को तीन साल पहले जब त्रिपुरा भेजा गया तो वहां पार्टी का कोई भी जनाधार नहीं थी. लेकिन देवधर की रणनीति से बीजेपी इस प्रदेश में कांग्रेस को पीछे छोड़ते हुए लोगों की पसंद बनने लगी. इतना ही नहीं देवधर ने पिछले तीन सालों में सभी 60 विधानसभा सीटों का दौरा किया. जिसमें खास जोर ग्रामीण इलाकों पर रहा. त्रिपुरा विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2018 LIVE: बीजेपी 41 सीटों पर और लेफ्ट 18 सीटों पर आगे देवधर ने पार्टी के लिए ऐसी रणनीति तैयार की जिससे त्रिपुरा के युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ा गया. उन्होंने इस दौरान अलग-अलग तबकों के लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को भी समझा. एबीपी न्यूज़ से देवधर के करीबी और त्रिपुरा में चुनाव की जिम्मेदारी देख रहे कपिल शर्मा ने कहा 'उन्होंने सभी 60 सीटों का दौरा कर बूथ कमेटी बनाई. जिन्होंने आम जन की समस्याओं को रैलियों में उठाया. जिसकी वजह से लोग बीजेपी के साथ जुड़ना शुरू हुए.' उन्होंने ये भी बताया कि इन चुनावों में त्रिपुरा के करीब 30 हज़ार युवाओं ने पार्टी के लिए काम किया. खुद कपिल के जिम्मे धलाई जिले की 6 विधानसभा सीटें थीं. जिनपर उन्होंने सभी छह सीटों पर पार्टी को जीत दिलाई. विधानसभा चुनाव 2018 LIVE: पूर्वोत्तर में चली मोदी लहर, योगी बोले त्रिपुरा में चुनाव प्रबंधन की जीत इतना ही नहीं त्रिपुरा में वाम, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के किले में जो सबसे बड़ी सेंधमारी का काम किया वो सुनील ने ही किया. 2018 के चुनावों से ठीक पहले इन तमाम बड़े दलों के कई नेता और विधायक भाजपा में शामिल हुए. जिससे पार्टी को बड़ा फायदा मिला. जीत के हीरो देवधर: महाराष्ट्र में जन्में सुनील देवधर हैं तो मराठी, लेकिन फर्राटेदार बंगाली के साथ-साथ कई और भाषाओं पर भी अपनी पकड़ रखते हैं. वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे हैं. वो मेघालय, त्रिपुरा, नगालैंड में खासी और गारो जैसी जनजाति के लोगों से मिलते हैं तो उनसे उन्हीं की भाषा में बात करते हैं. सुनील देवधर 12 सालों तक संघ के लिए प्रचारक भी भूमिका भी निभा चुके हैं. बीजेपी के नए हीरो देवधर ने 52 साल की उम्र तक शादी नहीं की है और संगठन में बड़ी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. LIVE मेघालय विधानसभा रिजल्ट 2018: मेघालय में सबसे बड़ी पार्टी बनती दिख रही है कांग्रेस, लेकिन अन्य दल बिगाड़ रहे हैं खेल2014 में पीएम के लिए भी कर चुके हैं काम: 2014 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़े थे. तब सुनील देवधर ने वहां भी उनके चुनाव और संगठन की कमान संभाली थी। इस दौरान वो पीएम के कैम्पेन में बूथ मैनेजर रहे. 2013 में दिल्ली विधानसभा में किया कमाल: आम आदमी पार्टी की लहर के वक्त सुनील देवधर को दिल्ली विधानसभा में दक्षिणी दिल्ली की 10 सीटों का प्रभारी बनाया गया. जिसमें इन्होंने पार्टी को 7 सीटें जितवाईं. माई होम इंडिया: सुनील देवधर ने साल 2005 में माई होम इंडिया नाम से एक एनजीओ की स्थापना की. जिसकी शुरूआत नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के लोगों की मदद करने को लेकर हुई.सुनील देवधर इस एनजीओ के संस्थापक और राष्ट्रीय संजोयक भी. जिससे हर साल दिल्ली और महानगरों में पढ़ने वाले नॉर्थ-ईस्ट के बच्चे बड़ी संख्या में जुड़े. माई होम इंडिया के कैम्पेन का फायदा भी इन चुनावों में नज़र आया. यह भी पढ़ें:रुझानों में बीजेपी की जबरदस्त कामयाबी पर जानिए किसने क्या कहानागालैंड विधानसभा चुनाव रिजल्ट 2018 LIVE : नागालैंड में एक बार फिर कांटे की टक्कर, BJP और NPF दोनों 27 सीटों पर आगेत्रिपुरा विधानसभा चुनाव: बीजेपी की ओर से सीएम रेस में विप्लव देव का नाम सबसे आगे: सूत्रपूर्वोत्तर में बीजेपी के धमाकेदार प्रदर्शन पर हार्दिक पटेल- सत्ता के लिए लड़ने वाला व्यक्ति किसी का नहीं होतानागालैंड में बीजेपी अन्य के साथ मिलकर बनाएगी सरकार : किरेन रिजिजू