Supreme Court: सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को मिली अंतरिम राहत फिलहाल बरकरार रहेगी. तीस्ता पर गुजरात दंगा केस में झूठे सबूत पेश कर कोर्ट को गुमराह करने का आरोप है. 1 जुलाई को गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें तुरंत सरेंडर को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने  उसी दिन इस पर रोक लगा दी थी. आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 19 जुलाई के लिए टाल दी.

पिछले साल हुई थी गिरफ्तारी

25 जून, 2022 को गुजरात पुलिस ने तीस्ता को गिरफ्तार किया था. 2 सितंबर, 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने तीस्ता को नियमित ज़मानत के लिए निचली अदालत या गुजरात हाई कोर्ट जाने को कहा था. अब गुजरात हाई कोर्ट ने पुलिस की तरफ से पेश सबूतों को देखते हुए तीस्ता को नियमित ज़मानत देने से मना कर दिया है. पुलिस ने यह बताया था कि तीस्ता ने तत्कालीन राज्य सरकार को अस्थिर करने के लिए कोर्ट में बनावटी सबूत पेश किए. गवाहों के भी झूठे हलफनामे दाखिल करवाए.

सुप्रीम कोर्ट ने की थी सख्त टिप्पणी

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने दंगों में मारे गए कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जाकिया जाफरी की याचिका खारिज की थी. जाकिया ने कोर्ट की तरफ से गठित SIT की जांच रिपोर्ट खारिज करने की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग ठुकराते हुए तीस्ता सीतलवाड़ पर भी टिप्प्णी की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि तीस्ता ने अपने फायदे के लिए जाकिया का इस्तेमाल किया. तीस्ता का मकसद किसी भी तरह इस मामले को बहुत दिनों तक जिंदा रखना था, ताकि उनको इसका फायदा मिलता रहे. ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए. इसके बाद गुजरात पुलिस ने तीस्ता को गिरफ्तार कर लिया था.

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