फ्लैट की खरीदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट से केंद्र को खास निर्देश जारी करने के लिए एक याचिका दाखिल की गई है, जिस पर कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. याचिका में अपील की गई है कि कोर्ट सरकार को ऐसी योजना बनाने के लिए निर्देश दे, जिसके तहत अगर 'सबवेंशन योजना’ में खरीदारों को फ्लैट नहीं मिलते हैं, तो वितरित की गई ऋण राशि का समान नुकसान कर्जदाता और बिल्डर दोनों को उठाना चाहिए.

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‘सबवेंशन योजना’ के तहत बैंक मंजूर किए गए लोन की राशि सीधे बिल्डर्स के अकाउंट में भेजते हैं, जिसके बाद बिल्डर की जिम्मेदारी होती है कि वह खरीदार को फ्लैट सौंपे जाने तक उस लोन की मासिक किस्तें चुकाए. हालांकि, जब बिल्डर त्रिपक्षीय समझौते के अनुसार बैंकों को ईएमआई देना बंद कर देते हैं, तो बैंक यह राशि फ्लैट खरीदारों से मांगने लगते हैं.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने याचिका पर नोटिस जारी कर केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है. याचिका में भी मांग की गई है कि रुकी हुई आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों के लिए एक व्यवस्थित ऋण-राहत योजना बनाई जाए और निर्माण की प्रगति के अनुसार ऋण राशि जारी करने का नियम सुनिश्चित किया जाए.

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सुप्रीम कोर्ट एक फ्लैट खरीदार की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने आरोप लगाया था कि उसे बुक किया गया फ्लैट नहीं मिला, लेकिन फिर भी ईएमआई चुकाने के लिए मजबूर किया गया. याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने दावा किया कि वित्तीय संस्थान ‘सबवेंशन योजना’ के नियमों का पालन नहीं कर रहे.

याचिका पर नोटिस जारी करते हुए बेंच ने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई भी जबरन कार्रवाई नहीं की जाए. याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि अगर ‘सबवेंशन योजना’ के तहत खरीदार को फ्लैट या संपत्ति उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो बैंक और बिल्डर दोनों को जारी किए गए पूरे लोन की राशि का बराबर नुकसान उठाना चाहिए.

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