चुनाव परिणाम का ऐलान एक ही बार में करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की दलील थी कि हर बूथ का परिणाम अलग से बताने से वोटर की निजता प्रभावित होती है. इसके चलते यह पता चल जाता है कि किसी खास इलाके से किसे कितने वोट मिले हैं. कोर्ट ने कहा कि टोटलाइजर व्यवस्था लागू करने के लिए नियमों में बदलाव की जरूरत होगी. ऐसे में केंद्र का रुख जानना जरूरी है. 

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2014 से लंबित याचिका की पैरवी के लिए पेश वकील अश्विनी उपाध्याय ने दलील दी कि कई बार चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक पार्टियां या उम्मीदवार उन इलाकों या बूथों के लोगों को निशाना बनाते हैं, जहां से उन्हें कम वोट मिले होते हैं.

आपसी रंजिश और हिंसा पर लगाम लगेगीअगर 14-15 ईवीएम मशीनों को एक साथ टोटलाइजर से जोड़कर गिना जाए, तो किसी भी पार्टी को यह पता नहीं चलेगा कि किस खास इलाके के लोगों ने किसे वोट दिया है. इससे चुनाव के बाद होने वाली आपसी रंजिश और हिंसा पर लगाम लगेगी.

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चुनाव आयोग के लिए पेश वरिष्ठ वकील डी एस नायडू ने कहा कि टोटलाइजर लागू करने में कई तरह की व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें हैं. सरकार ने इस बारे में एक एक्सपर्ट कमिटी बनाई थी. इस कमिटी ने टोटलाइजर के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया. मामले पर मंत्रियों के समूह ने भी विचार किया. कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने भी इसका विरोध किया है.

एक और याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि चुनाव आयोग 2007 से इस व्यवस्था के पक्ष में रहा है. अब उसका रुख बदल गया है. इस पर चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि टोटलाइजर व्यवस्था लागू करने के लिए चुनाव से जुड़े कानून और नियमों में बदलाव की जरूरत पड़ेगी.

केंद्र से मांगा जवाब

सभी पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 3 जजों की बेंच ने माना कि यह एक नीतिगत विषय है. बिना केंद्र सरकार के रुख के इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता. कोर्ट ने निर्देश दिया कि केंद्र सरकार नियम बदलने की संभावना पर अपना जवाब जल्द दाखिल करे.

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