नई दिल्ली: पूर्व क्रिकेटर इमरान खान 18 अगस्त को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की शपथ लेंगे. इमरान ने सुनील गावस्कर, कपिल देव और नवजोत सिंह सिद्धू को शपथ ग्रहण समारोह में आने का न्योता दिया है. सिद्धू कह चुके हैं कि वो शपथग्रहण में जाएंगे, इस बाबत सिद्धू ने गृहमंत्रालय को अर्जी भी है. सिद्धू के न्योता स्वीकार करने पर शिवसेना ने कड़ी आपत्ति जताई है. शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा है कि सिद्धू को पाकिस्तान जाने से पहले सीमा पर शहीद हुए कौस्तुभ राणे के घर जाना चाहिए.
संजय राउत ने कहा, ''नवजोत सिंह सिद्धू को सबसे पहले शहीद मेजर कौस्तुभ राणे के घर जाना चाहिए. उनके घर जाकर उनके परिवार से मिलें, उनके बच्चे से मिलें, उनकी पत्नी से मिलें. अगर उन्हें तसल्ली होती है तो फिर इमरान खान से मिलने की सोच सकते हैं.''
एबीपी न्यूज़ के पास न्योते की कॉपी नवजोत सिंह सिद्धू को पाकिस्तान से जो न्योता भेजा गया है उसकी एक कॉपी एबीपी न्यूज़ के पास है. इसमें लिखा है, ''पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रूप में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के अध्यक्ष इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह के लिए आपको आमंत्रित करने पर हमें बहुत खुशी है. शपथ ग्रहण समारोह शनिवार 18 अगस्त को इस्लामाबाद में होगा. हम चाहते हैं कि आप इस ऐतिहासिक अवसर पर पधारने की कृपा करें.''
इमरान खान को पीएम मोदी ने गिफ्ट में भेजा बैट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे पूर्व क्रिकेटर इमरान खान को बैट गिफ्ट गिया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने ये बैट हाईकमिशनर अजय बसारिया के हाथ पाकिस्तान भिजवाया है. बैट के साथ पीएम मोदी ने इमरान खान को संदेश भी भेजा है. खास बात यह है कि इस बैट पर पूरी भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के हस्ताक्षर हैं.
पाकिस्तान आम चुनाव के बाद इमरान खान को पीएम मोदी ने फोन करके बधाई भी दी थीं. पीएम मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए लोकतंत्र की मजबूती को लेकर आशा व्यक्त की थी. साथ ही उन्होंने शांति और विकास की उम्मीद भी जताई थी.
आगामी सरकार से जगी नई उम्मीद आपको बता दें कि पूर्ववर्ती पीएमएल (एन) की सरकार के दौरान भारत और पाकिस्तान के रिश्ते बेहद खराब रहे थे. अब आगामी सरकार से नई उम्मीद जगी है. हालांकि पाकिस्तान में चुनाव प्रचार के दौरान इमरान खान लगातार भारत खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते नजर आए थे. भारत में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इमरान खान के शासनकाल में भी रिश्ते सुधरने की उम्मीद कम है. इसकी बड़ी वजह इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के बीच नजदीकी है. पाकिस्तानी सेना कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए जानी जाती है.
