अरुणाचल प्रदेश से सटे एलएसी पर चल रहे तनातनी के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रुल ऑफ लॉ एंड फ्रीडम ऑफ नेविगेशन एंड ओवरफ्लाइट पर भारत का जोर किसी देश के विरुद्ध नहीं, बल्कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय हितधारकों के सामूहिक हितों की रक्षा करना है.

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उन्होंने कहा कि साउथ चाइना सी में चीन ने फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के नेविगेशन से लेकर आसमान में एयरक्राफ्ट उड़ान पर रोक लगा रखी है. उनकी ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब आसियान के कई सदस्य देश और विभिन्न लोकतांत्रिक राष्ट्र विवादित दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की बढ़ती सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के बीच यूएनसीएलओएस के पालन की लगातार मांग कर रहे हैं. 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, 'भारत और आसियान की युवा आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत है. इसी सामर्थ्य को नई दिशा देने के लिए भारत ने एक मजबूत डिफेंस यूथ ब्रिज स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो लोगों के बीच की कनेक्टिविटी, डिजिटल इनोवेशन और कैपेसिटी बिल्डिंग को बढ़ावा देगा. युवाओं को सशक्त बनाकर हम एक शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध इंडो-पैसिफिक के भविष्य को मजबूत करेंगे.' इस दौरान रक्षा उन्होंने आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र कर पाकिस्तान पर भी निशाना साधा.

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उन्होंने कहा, 'आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि दशकों के जमीनी अनुभव और सफल अभियानों से मजबूत हुई है. ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त कर स्टेट स्पॉन्सर टेररिज्म के खिलाफ भारत के दृढ़ संकल्प को दुनिया के सामने रखा. भारत अपने ADMM-Plus partners के साथ इस अनुभव को शेयर करते हुए एक सुरक्षित, स्थिर और शांतिपूर्ण इंडो-पैसिफिक के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है.'

उन्होंने कहा, 'आतंकवाद के खिलाफ हमारी हर रणनीति को वास्तविक अभियानों में परखा गया है और उसे सफल साबित किया गया है.' रक्षा मंत्री ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत के दृष्टिकोण को भी सामने रखा. उन्होंने कहा, 'हम ऐसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र का समर्थन करते हैं, जो सुरक्षित और संकटों का सामना करने में सक्षम हो-ऐसा क्षेत्र, जहां शांति और स्थिरता केवल आकांक्षाएं न हों, बल्कि हमारे सामूहिक प्रयासों का परिणाम हों.'

राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत समुद्री सुरक्षा को क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और समृद्धि से जुड़ा हुआ विषय मानता है. उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन, विशेष रूप से समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र के समझौते (यूएनसीएलओएस) पर भारत का जोर, और नौवहन तथा हवाई उड़ानों की स्वतंत्रता का समर्थन किसी देश के खिलाफ नहीं है. इसके बजाय, इसका उद्देश्य क्षेत्र के सभी पक्षों के सामूहिक हितों की रक्षा करना है.'