प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (7 अगस्त, 2026) को एक बार फिर से सरकार के सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने सचिवों को कई मूल मंत्र दिए. उन्होंने कहा कि सचिव सिर्फ तत्काल चुनौतियों और आंकड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि देश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ काम करें. भारत के विकास की दिशा तय करने के लिए लंबी अवधि की सोच जरूरी है.

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सचिवों के साथ किन मुद्दों पर पीएम मोदी की हुई बातचीत?

IANS के मुताबिक, पीएम मोदी ने अपने आवास पर सचिवों के साथ तीसरी उच्चस्तरीय बैठक की. इस बैठक में प्रधानमंत्री ने सचिवों के साथ बुनियादी ढांचा और कनेक्टिविटी, सुरक्षा और विदेश मामलों से लेकर सुशासन से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य के एजेंडों पर चर्चा की.

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उन्होंने बैठक में विभागों के बीच तालमेल की कमी (साइलो) को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि यह सिर्फ संगठनात्मक नहीं, बल्कि सोच से जुड़ी समस्या भी है. उन्होंने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों का स्वामित्व लेने और अपनापन की भावना के साथ काम करने का आह्वान किया. उन्होंने कोरोना महामारी और पश्चिम एशिया युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान विभिन्न मंत्रालयों और विभागों ने बेहतर समन्वय के साथ काम किया था. ऐसी समन्वय व्यवस्था ही सरकार की कार्यशैली का का स्थायी हिस्सा बननी चाहिए.

AI के इस्तेमाल को लेकर बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग को लेकर कहा, ‘एआई का प्रभावी इस्तेमाल किया जाए, लेकिन इसमें इंसानी हस्तक्षेप और फैसले लेने की क्षमता भी बनी रहनी चाहिए.’ उन्होंने एआई और इंसानी विशेषज्ञता को साथ जोड़कर नए समाधान विकसित करने पर जोर दिया. उन्होंने कहा, ‘डेटा देश की महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संपत्ति और भविष्य का संसाधन है. सरकार डेटा जुटाने, सुरक्षित रखने और प्रबंधन पर बड़े संसाधन खर्च करती है, लेकिन विभागीय अलगाव और बिखरी प्रणालियों के कारण उसकी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पाता है.’ उन्होंने डेटा इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर डेटा साझाकरण की आवश्यकता बताई. 

नीति निर्माण में नए विचार लाने पर पीएम ने दिया जोर

इसके साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति निर्माण में नए विचार लाने के लिए सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच ज्यादा संवाद बढ़ाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि युवाओं और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी से नए और अपरंपरागत विचार सामने आ सकते हैं.

जबकि डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत के डिफेंस उद्योग को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाना चाहिए. इसके लिए रक्षा शिक्षा और मानव संसाधन विकास को भी मजबूत करना होगा.

समुद्री क्षेत्र को लेकर चर्चा पर बोले मोदी

इसके अलावा, समुद्री क्षेत्र पर चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘जहाज निर्माण को पहले ही बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया जा चुका है और अब मिशन मोड में इसकी प्रगति की समीक्षा की जानी चाहिए.’

उन्होंने बंदरगाह विकास से आगे बढ़कर पोर्ट-लेड डेवलपमेंट की दिशा में काम करने पर जोर दिया. इसके साथ ही, उन्होंने विनिर्माण इकाइयों और एक्सपोर्ट उन्मुख उद्योगों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी बताई, ताकि भारत की विनिर्माण और एक्सपोर्ट क्षमता को समुद्री बुनियादी ढांचे का पूरा लाभ मिल सके. 

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