वंदे मातरम विवाद को लेकर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि वंदे मातरम को लेकर साल 1937 में पारित रिजोल्यूशन ही एकमात्र रिजोल्यूशन था, कल तक तो कोई नया प्रस्ताव नहीं था. इसलिए अब अमित शाह 1937 के रिजोल्यूशन की निंदा कर रहे हैं. अमित शाह पहले तो अपने आपकी तुलना सरदार पटेल से करते थे, अब वे उनसे भी बड़े हो गए हैं.
उन्होंने कहा कि जिस 1937 के प्रस्ताव की अमित शाह निंदा कर रहे हैं, उसमें सरदार पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और सी. राजगोपालाचारी, सभी शामिल थे और यह प्रस्ताव किसकी सलाह पर किया गया था, तो गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर पारित किया गया था, तो क्या अमित शाह अब इन सभी से बड़े हो गए हैं कि वे 1937 के रिजोल्यूशन की निंदा कर रहे हैं?
गांधी-नेहरू, पटेल भी बड़े हो गए हैं शाह- खेड़ा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा, ‘संविधान सभा में यह तय किया गया था कि वंदे मातरम के दो अंतरों को गाया जाएगा. क्या वे संविधान सभा से भी बड़े हो गए हैं? ये अंबेडकर से भी बड़े हैं, सरदार पटेल से भी बड़े हैं, नेहरू-गांधी से भी बड़े हैं, सबसे बड़े हो गए हैं ये. हम इनकी मानें या सरदार पटेल की मानें, हम इनकी मानें या गांधी जी की मानें, हम इनकी मानें या संविधान सभा की मानें?
उन्होंने अमित शाह की तीखे शब्दों में आलोचना करते हुए कहा, ‘आखिर ये अपने आपको क्या समझते हैं? खुदा समझते हैं, भगवान समझते हैं? हैं कौन ये, औकात क्या है इनकी?’
20 दिनों से संसद से गायब थे- खेड़ा
कांग्रेस नेता ने आगे कहा, ‘अब वे इतने दिनों के बाद आए हैं, इनका प्रकटोत्सव हुआ है. 20 दिन संसद से दुम दबाकर भाग गए थे. बताइए फायरिंग किसने की थी, पैलेट गन किसने चलाई थी नौजवानों पर? जो अपना काम है उसी पर रहिए. अपना काम करते नहीं हैं और चले हैं सरकार पटेल का काउंटर करने.’
उन्होंने कहा, ‘अमित शाह बताएं कि पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था. लड़कियों पर लाठियां किसने चलवाई थी. जो काम आपको इस देश ने दिया है, पहले वो काम करके दिखाइए. वो करने की औकात नहीं हैं और चले हैं महात्मा गांधी और सरदार पटेल का मुकाबला करने.’
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