AIMIM अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने जनगणना से जुड़े डेटा को संभालने के तरीके और राष्ट्रीय सर्वे के सिस्टम में बदलावों पर चिंता जताई है. उनका तर्क है कि सही आंकड़े ही असरदार शासन, कल्याणकारी योजनाओं और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का आधार होते हैं.

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मशहूर कहावत, "तीन तरह के झूठ होते हैं: झूठ, बहुत बड़े झूठ और आंकड़े" का ज़िक्र करते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि क्या डेटा इकट्ठा करने के सिस्टम को कमज़ोर करने से देश में जानकारी-आधारित पॉलिसी बनाने की प्रक्रिया कमज़ोर हो सकती है. ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब चुनाव क्षेत्रों की सीमा तय करने, संसाधनों के बंटवारे और कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने में जनगणना डेटा के महत्व पर लगातार चर्चा हो रही है. ओवैसी ने तर्क दिया कि जनसंख्या के आंकड़े सिर्फ़ सांख्यिकीय रिकॉर्ड नहीं हैं, बल्कि सरकारें इनका इस्तेमाल विकास की योजनाओं को बनाने, सामाजिक ज़रूरतों का आकलन करने और फ़ायदों का सही बंटवारा सुनिश्चित करने के लिए करती हैं.

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सर्वे डेटा में बदलाव पर चिंताहैदराबाद के सांसद ने राष्ट्रीय सर्वे के दायरे में बताए जा रहे बदलावों पर भी चिंता जताई, खासकर साफ़-सफ़ाई के तरीकों और घरों में खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ईंधन जैसे मुद्दों पर डेटा इकट्ठा करने को लेकर. ओवैसी के अनुसार, ऐसी जानकारी लोगों के रहन-सहन की स्थिति को समझने और जन-कल्याण के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं के असर का आकलन करने में अहम भूमिका निभाती है.

नीति निर्माण में भरोसेमंद आंकड़ों की अहमियतओवैसी का कहना है कि पॉलिसी से जुड़े फ़ैसले अंदाज़ों के बजाय पूरी और पारदर्शी जानकारी पर आधारित होने चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि जानकारी में कमी स्वास्थ्य, पोषण, खाद्य सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े क्षेत्रों में लंबी अवधि की योजना बनाने पर असर डाल सकती है. ओवैसी ने कहा कि भरोसेमंद आंकड़ों से सरकारें चुनौतियों की सही पहचान कर पाती हैं और संसाधनों को वहां पहुंचा पाती हैं जहां उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है.यह भी पढ़ें : Kumbh 2027: मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लिखी चिट्ठी, कहा- आपका स्वागत है