राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)के संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव की तैयारी है. संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद संगठन की मौजूदा संरचना में बदलाव किए जायेंगे. इसके तहत संघ में 11 क्षेत्रों की जगह 9 क्षेत्र होंगे, जबकि मौजूदा 46 प्रांतों की जगह करीब 90 संभाग बनाए जाएंगे. इसके अलावा पहली बार संघ की संगठनात्मक संरचना में राज्य स्तर की इकाई भी शामिल की जाएगी.
प्रस्तावित बदलावों के तहत राज्य स्तर पर केवल राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह की व्यवस्था होगी. राज्य संघचालक का पद इस इकाई में नहीं होगा. अब तक संघ की संगठनात्मक संरचना में राज्य स्तर पर अलग इकाई का प्रावधान नहीं था.
प्रतिनिधि सभा में होंगे बदलाव
संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक की में भी बदलाव किए जाने की योजना है. अब तक प्रतिवर्ष होने वाली प्रतिनिधि सभा की बैठक तीन वर्ष में एक बार आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है. यह बैठक नागपुर में हुआ करेगी. अब संरचनात्मक बदलाव के बाद अब प्रातिनिध सभा में शामिल होने वाले सदस्यों की संख्या पहले से तकरीबन दो गुनी हो जाएगी. संख्या बढ़कर अब तकरीबन 2500 हो जाएगी. वहीं, क्षेत्रीय स्तर पर हर दो वर्ष में बैठकों का आयोजन किया जाएगा.
विकेंद्रीकृत होगा संघ
संघ के संगठनात्मक ढांचे में इन बदलावों का प्रमुख उद्देश्य संगठन के कामकाज को विकेंद्रीकृत करना और कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करना है. प्रांतों की संख्या बढ़ाकर संभागों का गठन किए जाने से संगठनात्मक जिम्मेदारियों का बेहतर वितरण हो सकेगा और जमीनी स्तर पर समन्वय को मजबूती मिलने की उम्मीद है. पुनर्गठन के जरिए संघ अपने संगठनात्मक विस्तार और कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. इन बदलावों के लागू होने के बाद संघ की क्षेत्रीय और प्रांतीय व्यवस्था के साथ-साथ राज्य स्तर पर भी संगठनात्मक समन्वय का नया ढांचा तैयार होगा.
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