CEA वी. अनंत नागेश्वरन ने इलेक्शन कमीशन को अधिक शक्ति देने का विरोध किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि इन शक्तियों को लेकर कानून में और स्पष्टता की जरूरत है. हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन एस. महेंद्र देव और विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन के चेयरमैन एस. गुरुमूर्ति के साथ मिलकर कई जरूरी मुद्दों पर सलाह दी है. उन्होंने एक साथ चुनाव कराने के विचार का मोटे तौर पर समर्थन किया है.
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने JPC के सामने कहा कि देश में बार-बार चुनाव होने से सरकार का काफी पैसा खर्च होता है. ऐसे में एक चुनाव होने पर पैसों की बचत होगी, जो देश के दूसरे तमाम बड़े कामों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
उनका कहना है कि लगातार चुनाव होने से नीतियों पर काम करने में रुकावट आ सकती है. नागेश्वरन के मुताबिक, अगर लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो चुने हुए प्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं को लगातार चुनाव प्रचार में समय लगाने के बजाय शासन और विकास के कामों पर ज्यादा ध्यान देने का मौका मिल सकता है.
गुरुमूर्ति ने संघीय ढांचे को लेकर रखी अपनी राय
एस. गुरुमूर्ति ने भी एक साथ चुनाव के पक्ष में अपनी बात रखी. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव प्रशासन और राज्यों के कामकाज में लगातार रुकावट पैदा करते हैं और इसका असर संघीय ढांचे पर भी पड़ता है. गुरुमूर्ति के अनुसार, चुनावों को एक साथ कराने से ऐसी रुकावटें कम हो सकती हैं और इससे फेडरल स्ट्रेक्टर मजबूत हो सकता है. उन्होंने लगातार चुनावों से प्रशासनिक दबाव और चुनावी खर्च बढ़ने की बात भी रखी. हालांकि, एक साथ चुनाव के विचार का समर्थन करने के बावजूद नागेश्वरन ने ECI को दी जाने वाली अतिरिक्त शक्तियों को लेकर कुछ सवाल उठाए.
JPC किन कानूनों की जांच कर रही है?
JPC संविधान के 129वें संशोधन विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही है. इन प्रस्तावों का मकसद लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की व्यवस्था तैयार करना है. प्रस्तावित व्यवस्था में राज्यों की विधानसभा के कार्यकाल को एक बार के लिए इस तरह बदले जाने का प्रावधान है कि आगे लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जा सकें.
