राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने ऑपरेशन सिंदूर के पीछे की रणनीति और सरकार के फैसलों को लेकर अहम जानकारी साझा की है. उन्होंने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई के लिए अपने लक्ष्य कैसे तय किए और आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाने की योजना किस तरह तैयार की गई.

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डोभाल ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद के हालात को याद करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना विदेश दौरा छोटा किया था. भारत लौटने के बाद एयरपोर्ट पर ही एक बैठक हुई. डोभाल के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सबसे पहले घटना से जुड़े तथ्य जानने की कोशिश की और पूछा कि हमले के पीछे कौन था. इसके बाद उन्होंने आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया.

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खुफिया एजेंसियों ने जुटाई अहम जानकारी

NSA के मुताबिक, भारतीय खुफिया एजेंसियों ने कम समय में हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इसके बाद जवाबी कार्रवाई के लिए जरूरी जानकारी जुटाई गई. डोभाल ने कहा कि ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य उन आतंकी ढांचों को निशाना बनाना था, जिन्हें पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार माना गया था. डोभाल ने भारत की सुरक्षा नीति को लेकर कहा कि देश जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा के लिए कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा. उन्होंने साफ संदेश दिया कि भारत की सहनशीलता का मतलब कमजोरी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर भारत किसी भी सीमा तक जाने के लिए तैयार है.

88 घंटे चला था ऑपरेशन सिंदूर

ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी सैन्य कार्रवाई के तौर पर बताया गया. इस अभियान के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया. डोभाल के बयान से पहली बार इस अभियान के पीछे की रणनीतिक सोच और लक्ष्य तय करने की प्रक्रिया को लेकर ज्यादा जानकारी सामने आई है.