राजस्थान के जयपुर जिले के जमवारामगढ़ स्थित बिवाल परिवार से जुड़े NEET पेपर लीक मामले में अब एक और बड़ा खुलासा सामने आया है. जिस छात्र ऋषि के लिए कथित तौर पर NEET का पेपर खरीदे जाने की बात कही जा रही है, उसकी 12वीं की मार्कशीट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

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जानकारी के अनुसार, ऋषि 12वीं की परीक्षा सेकंड डिवीजन से पास हुआ था और उसे कई विषयों में बहुत कम अंक मिले थे. बताया गया है कि थ्योरी परीक्षा के कुल 56 अंकों में उसे फिजिक्स में सिर्फ 9 अंक, केमिस्ट्री में 15 अंक और बायोलॉजी में केवल 20 अंक मिले थे. वह ग्रेस अंकों की मदद से परीक्षा पास कर पाया.

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परीक्षा सिस्टम की ट्रांसपिरेंसी पर सवाल

इस मामले को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि अगर कथित पेपर लीक का खुलासा नहीं होता तो संभव है कि यही छात्र NEET में अच्छे अंक लाकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला हासिल कर लेता. ऐसे में एक कमजोर प्रदर्शन करने वाला छात्र डॉक्टर बनने की राह पर पहुंच जाता. इस मामले ने परीक्षा सिस्टम की ट्रांसपिरेंसी और मेडिकल एजुकेशन की विश्वसनीयता को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अगर अयोग्य छात्र गलत तरीके से मेडिकल कॉलेज में पहुंचेंगे तो भविष्य में इसका असर सीधे स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ेगा. पेपर लीक जैसी घटनाएं सिर्फ परीक्षा की निष्पक्षता को नुकसान नहीं पहुंचातीं, बल्कि मेहनत करने वाले छात्रों के साथ भी बड़ा अन्याय करती हैं. साथ ही इससे समाज का शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं पर भरोसा भी कमजोर होता है.

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