नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना के पाकिस्तान में किए गए एयर स्ट्राइक के बाद रविवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दावा किया कि इस हमले में 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं. अब इस बयान पर सियासी घमासान शुरू हो गया है. विपक्ष पूछ रहा है कि अमित शाह को यह आंकड़ा कहां से मिला.
अब पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पूछा है कि 300 आतंकी मारे गए या नहीं. सिद्धू ने ट्वीट किया, ''300 आतंकवादी मारे गए, हां या नहीं? फिर क्या मकसद था? आप आतंकवादियों को मार रहे थे या पेड़ को उखाड़ रहे थे? विदेशी शत्रु से लड़ने की आड़ में छल हमारे जमीन पर हो रही था. क्या यह चुनावी हथकंडा था? सेना का राजनीतिकरण बंद करो, यह देश की तरह पवित्र है.''
बता दें कि सिद्धू पुलवामा हमले के बाद से ही अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं. सिद्धू ने सबसे पहले पुलवामा आतंकी हमले के बाद बयान दिया था और इससे वह विवादों से घिर गए थे. इसके बाद भारतीय वायुसेना के एयर स्ट्राइक के बाद भी उन्होंने विवादित बयान जारी किया था. उन्होंने कहा था कि शांति बहाल न हुई तो विंग कमांडर अभिनंदन जैसी घटनाएं फिर हो सकती हैं.
अमित शाह ने क्या कहा था
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पुलवामा हमले के तेरह दिन बाद पाकिस्तान में हुई एयर स्ट्राइक को लेकर बड़ा बयान दिया. अमित शाह ने गुजरात के शहर अहमदाबाद में कहा कि इस एयर स्ट्राइक में 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए. अमित शाह ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ममता-राहुल सस्ती राजनीति करने से बचें. अमित शाह ने कहा, ''पुलवामा हमले के सभी को लगा कि इस बार सर्जिकल स्ट्राइक नहीं हो सकती, इस बार क्यो होगा? उस प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने 13वें दिन एयर स्ट्राइक की जिसमें 250 से ज्यादा आतंकी मारे गए.''
बीजेपी के मंत्री ने कहा- सरकार ने नहीं किया 300 आतंकियों के मारे जाने का दावा मोदी सरकार के मंत्री एस एस आहलुवालिया ने कहा है कि सरकार ने कभी नहीं कहा कि तीन सौ आतंकी मारे गए हैं. अहलुवालिया ने बंगाली में कहा, ''भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया में मारे गए आतंकियों के अपुष्ट आंकड़े प्रसारित किए जा रहे थे. एयर स्ट्राइक के बाद मोदी जी ने राजस्थान के चुरू में रैली की. क्या मोदी जी ने कभी कहा कि स्ट्राइक में 300 लोग मारे गए? क्या बीजेपी के किसी प्रवक्ता ने कभी कहा कि स्ट्राइक में 300 लोग मारे गए. क्या अमित शाह ने कहीं ये कहा. हमले का उद्देशय संदेश मारना नहीं संदेश देना था, यह जरूरी था. हम नहीं चाहते थे कि किसी की जान जाए.''