बीजेपी के संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर हालिया घटनाक्रमों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में होने वाले फेरबदल और विस्तार की अटकलों को तेज कर दिया है. पार्टी ने केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन को राज्यसभा के लिए फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया है, जबकि दोनों का राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है. इसके अलावा प्रधानमंत्री पिछले दिनों प्रधानमंत्री सभी विभागों के कामों की समीक्षा करके उनके कामों की रिपोर्ट तैयार कर चुके हैं.
बीजेपी ने कल 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. लिस्ट में केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू और जॉर्ज कुरियन का नाम शामिल नहीं है. रवनीत बिट्टू राजस्थान और जॉर्ज कुरियन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सांसद हैं. ऐसे में उनकी राज्यसभा की सदस्यता 21 जून को समाप्त हो जाएगी. कयास यही लगाए जा रहे हैं रवनीत बिट्टू को पंजाब चुनाव में जिम्मेदारी देकर भेजा जाएगा.
यह भी पढ़ें :Saharanpur News: UP से निकला मोहाली ब्लास्ट का कनेक्शन, देवबंद से दबोचा जैश-ए-मोहम्मद का संदिग्ध आतंकी मोहत्सीम
भाजपा में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्तिइसके साथ साथ भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जबकि केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा की कमान सौंपी गई है. दोनों नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी मिलने के बाद यह चर्चा भी तेज हो गई है कि केंद्र सरकार में उनकी भूमिकाओं को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाएगा. आगामी दिनों में यूपी में चुनाव भी होने हैं.
चुनावी रणनीति के तहत संगठनात्मक बदलावपार्टी सूत्रों का मानना है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों, संगठनात्मक पुनर्गठन और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए सरकार और संगठन में व्यापक बदलावों पर विचार कर रही है. राज्यसभा नामांकन, नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति और कुछ मंत्रियों की बदलती भूमिकाओं को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. अगले साल यूपी , पंजाब समेत सात राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में उनको मंत्रिमंडल विस्तार और संगठन में अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की भी चर्चा है.
मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा का असरप्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी विभागों से उनके काम का ब्यौरा भी मांगा था, उसके बाद मंत्री परिषद की बैठक में सभी विभागों के कामों की समीक्षा भी की गई थी. विभागों की समीक्षा के दौरान उनको रेटिंग्स भी दिए गए थे. जिन विभागों का काम आकांक्षा के अनुरूप नहीं रहा है वो भी मंत्रीमंडल विस्तार में एक महत्वपूर्ण फैक्टर होने वाला है.
यह भी पढ़ें :Punjab Politics: मध्य प्रदेश से पंजाब की सियासत साधने की जुगत में बीजेपी! कांग्रेस और आप की बढ़ेंगी मुश्किलें?
