तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने पार्टी के 28 साल के इतिहास में पहली बार हुए विभाजन के बाद पार्टी से और अधिक विधायकों के पाला बदलने को रोकने के प्रयास शुरू कर दिए हैं. वह व्यक्तिगत रूप से बागी विधायकों से संपर्क साध रही हैं, जबकि वरिष्ठ नेता अन्य विधायकों को एकजुट रखने के लिए काम कर रहे हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि ममता बनर्जी ने पिछले दो दिनों में हावड़ा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर के कई विधायकों से बात की है, जिनमें से कई को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे की बैठकों में भाग लेते देखा गया था.

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तृणमूल के 58 विधायकों ने पार्टी विधायक दल पर नियंत्रण कर लिया और निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना. पार्टी को एकजुट रखने के प्रयास ऐसे समय में किए जा रहे हैं, जब तृणमूल की संस्थापक खुद को एक ऐसी असहज स्थिति में पाती हैं, जहां उन्हें उन नेताओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जिन्हें उन्होंने कभी खुद चुना था और राजनीतिक रूप से मजबूत किया था.

तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘ममता बनर्जी विधायकों से व्यक्तिगत रूप से बात कर रही हैं और उनसे शुक्रवार (5 जून 2026) को कालीघाट में होने वाली बैठक में शामिल होने का अनुरोध कर रही हैं. प्रयास यह है कि संवाद के रास्ते खुले रहें और सुलह की संभावना तलाशी जाए.’ सूत्रों के अनुसार, पार्टी सांसदों की टूट की आशंका के चलते इस मोर्चे पर भी प्रयास किए जा रहे हैं.

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रिपोर्ट के मुताबिक तृणमूल के दो भरोसेमंद सांसदों- एक लोकसभा से और एक राज्यसभा से को पार्टी के सहयोगियों से संपर्क करने और उन्हें ऋतब्रत बनर्जी खेमे द्वारा बनाई जा रही नई तृणमूल के लिए संगठन को न छोड़ने के लिए राजी करने का काम सौंपा गया है. यह पहल तृणमूल कांग्रेस के शेष नेतृत्व के भीतर बढ़ती चिंता को दर्शाती है कि यदि बागी विधायकों के विद्रोह को जल्द ही नियंत्रित नहीं किया गया तो यह सांसदों और स्थानीय निकाय सदस्यों को भी अपने खेमे में जोड़ सकते हैं.

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