अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गोवा सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर बड़ा फैसला लिया है. राज्य सरकार ने 82 लाख वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र को ‘नो डेवलपमेंट जोन’ (एनडीजेड) घोषित किया है. इस कदम को एक तरफ पर्यावरण बचाने की कोशिश माना जा रहा है, तो दूसरी ओर इसे चुनाव से पहले सरकार की राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है.

Continues below advertisement

सरकार ने पहाड़ी ढलानों, बागान क्षेत्रों, धान के खेतों और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील इलाकों को संरक्षण दायरे में लाने का फैसला किया है. टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीसीपी) बोर्ड द्वारा मंजूर प्रस्ताव के तहत माजोर्डा, गोंसुआ, क्वेरीम और मंड्रेम जैसे इलाकों में निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाएगा. अधिकारियों के अनुसार, तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट और पर्यटन दबाव के कारण इन क्षेत्रों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो रही थी.

यह भी पढ़ें:

Continues below advertisement

TVK चीफ विजय ने पेश किया सरकार बनाने का दावा, 'थलापति' के पास 121 विधायकों का समर्थन

क्या कहते हैं सरकारी आंकड़े? 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सत्तारी तालुका के क्वेरीम क्षेत्र में लगभग 65.31 लाख वर्गमीटर भूमि और पेरनेम के मंड्रेम क्षेत्र में करीब 6.44 लाख वर्गमीटर क्षेत्र को संरक्षण दायरे में शामिल किया गया है. इसके अलावा मांडवी और जुआरी नदी के किनारे करीब 6.72 करोड़ वर्गमीटर क्षेत्र को पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है.

यह भी पढ़ें

धोनी बने सबसे बड़े टैक्सपेयर, IPL के बाहर भी 'कैप्टन कूल' का जलवा, बड़े-बड़े दिग्गजों को पीछे छोड़ा

विश्वजीत राणे ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, हरित क्षेत्रों और कृषि भूमि को बचाना है. उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में धान के खेतों और निचले इलाकों को भी बड़े पैमाने पर एनडीजेड घोषित किया जा सकता है.

हालांकि विपक्ष और कुछ रियल एस्टेट समूह इस फैसले को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. उनका कहना है कि चुनाव से पहले सरकार पर्यावरण संरक्षण के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रही है. वहीं पर्यावरणविद इसे गोवा के प्राकृतिक संतुलन को बचाने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं.