पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सत्ता से विदाई के 10 दिन के भीतर ही TMC महासचिव अभिषेक बनर्जी को दूसरा बड़ा झटका लगा है. चुनाव में भड़काऊ बयान देने और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ टिप्पणी करने को लेकर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब कोलकाता नगर निगम (KMC) ने नियमों के उल्लंघन को लेकर उन्हें एक आधिकारिक नोटिस जारी किया है. यह नोटिस कोलकाता के पॉश इलाकों कालीघाट रोड और हरीश मुखर्जी रोड पर स्थित उनके आवासों को लेकर भेजा गया है.
निगम ने निर्माण कार्यों पर उठाए सवाल
केएमसी सूत्रों के मुताबिक, निगम ने अभिषेक बनर्जी के दोनों आवासों के निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. यह कार्रवाई कोलकाता नगर निगम अधिनियम की धारा 401 के तहत की गई है. निगम यह जांच कर रहा है कि क्या इन दोनों संपत्तियों के निर्माण के दौरान तय शहरी मानदंडों और बिल्डिंग बायलॉज का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं.
अभिषेक बनर्जी को भेजे गए नोटिस में सवाल उठाए गए हैं कि क्या दोनों घरों के निर्माण के लिए निर्धारित केएमसी गाइडलाइंस का पालन हुआ? क्या इन आवासों में किए गए किसी भी अतिरिक्त निर्माण या विस्तार के लिए निगम से पूर्व अनुमति ली गई थी? अभिषेक बनर्जी को निर्देश जारी किया गया है कि वे दोनों आवासों की स्वीकृत 'भवन योजना' (Building Plan) तुरंत निगम के सामने पेश करें.
कोलकाता नगर निगम अधिनियम की धारा 401 के तहत निकाय के पास यह अधिकार है कि वह किसी अवैध या बिना परमिशन के बनने वाले निर्माण कार्य को रोकने के लिए नोटस जारी कर सकता है और उससे जुड़े डॉक्यूमेंट्स की मांग कर सकता है. इस नोटिस के बाद कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. फिलहाल इस मामले पर तृणमूल कांग्रेस या अभिषेक बनर्जी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
इससे पहले अभिषेक बनर्जी के खिलाफ बिधाननगर नॉर्थ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई गई थी. अभिषेक बनर्जी पर आरोप है कि उन्होंने चुनावों से पहले भड़काऊ बयान दिए और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ भी टिप्पणी की
'जेड प्लस' सिक्योरिटी ली जा चुकी वापस
इससे पहले पश्चिम बंगाल की सरकार ने अभिषेक बनर्जी की 'जेड प्लस' सुरक्षा वापस ले ली थी. पिछले 10 वर्षों से ज्यादा समय से अभिषेक बनर्जी को जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई थी. हालांकि, पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के तुरंत बाद उनकी सुरक्षा में कटौती शुरू हो गई. अब नई राज्य सरकार ने उनकी 'जेड प्लस' सुरक्षा पूरी तरह वापस लेने का फैसला लिया है.
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