भारत के अंतरिक्ष मिशन के लिहाज से जनवरी, 2026 की शुरुआत बेहद ही खराब रही है और इसकी वजह यह है कि इसरो का 64वां अंतरिक्ष मिशन तीसरे स्टेज में आकर फेल हो गया है. इसकी वजह से रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) का बनाया अन्वेषा सैटेलाइट और साथ ही 15 अन्य सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में खो गए हैं, जिसे भारत के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान यानी ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट PSLV है, इसका पूरा नाम पोलर सेटेलाइट लॉन्च वीकल है. दुनिया भी PSLV की काबिलियत का लोहा मानती है क्योंकि इसकी सफलता का औसत 95 फीसदी से भी ज्यादा का है. इसके जरिए इसरो के 63 मिशन पूरी तरह से सफल रहे हैं. चाहे वो बात चंद्रयान-1 की हो या फिर मंगलयान की, आदित्य-L1 की हो या एस्ट्रोसैट की, पीएसएलवी ने अपने मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए हैं. इसके अलावा, साल 2017 में तो पीएसएलवी ने एक साथ 104 सैटेलाइट्स लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया था.
PSLV-C62 से लॉन्च होने थे कुल 16 सैटेलाइट
इसी सफलता को देखते हुए सोमवार (12 जनवरी, 2026) को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 लॉन्च किया गया था. इसके साथ कुल 16 सैटेलाइट थे. इनमें एक सैटेलाइट डीआरडीओ का बनाया हुआ EOS-N1 था, जिसे आम फहम भाषा में अन्वेषा कहा गया. सैटेलाइट भारतीय सेना के लिए एक जरूरी हथियार की तरह था, जिससे पाकिस्तान और चीन की निगरानी की जा सकती थी और खुफिया जानकारी जुटाई जा सकती थी.
यह सैटेलाइट धरती से 600 किमी की ऊंचाई से भी दुश्मन देश की निगरानी कर सकता था, तस्वीरें खींच सकता था और भारतीय सेना के लिए नए-नए रूट्स बना सकता था और भी 14 सैटेलाइट इस पीएसएलवी के साथ थे, जिन्हें धरती से 512 किलोमीटर की ऊंचाई पर सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट यानी कि SSO में स्थापित किया जाना था.
कौन से स्टेज में फेल हुआ भारत का स्पेस मिशन?
यह पूरा मिशन 6485.14 सेकेंड का था, जिसमें कुल चार स्टेज थे. दो स्टेज तक पीएसएलवी सही काम करता रहा, लेकिन तीसरे स्टेज में 494 सेकेंड के आस-पास गड़बड़ी हुई और पीएसएलवी अंतरिक्ष में ही भटक गया. इसके साथ ही इसके सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में ही खो गए.
इस घटना के बारे में इसरो के चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन ने विस्तार से बताते हुए कहा कि रॉकेट लॉन्चिंग के तीसरे चरण में गड़बड़ी आ गई, जिसके कारण वह रास्ता भटक गया.
मिशन फेल होने से भारत को 800 करोड़ का नुकसान
माना जा रहा है कि इस असफलता की वजह से भारत को करीब 800 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. हालांकि, ये कोई पहला मौका नहीं है जब इसरो को इतना बड़ा झटका लगा हो. इससे पहले भी 18 मई, 2025 को इसरो के ही पीएसएलवी-C61 मिशन के साथ ही यही हुआ था. तब भी उस मिशन में भारत का एक जरूरी सैटेलाइट अर्थ ऑब्जर्वेशन जा रहा था, जिसे धरती से 524 किमी ऊपर सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था. तब भी ये दो चरणों तक सही जा रहा था और तीसरे चरण में रास्ता भटकने की वजह से ये भी अंतरिक्ष में खो गया था.
PSLV के बार-बार फेल होने का ISRO पर पड़ सकता है असर
पीएसएलवी के लगातार दो-दो मिशन फेल होने की वजह से इसरो को बड़ा झटका लगा है और अब इसरो फिर से इसकी जांच कर रहा है, लेकिन इस असफलता ने इसरो पर सवाल तो खड़े कर ही दिए हैं. क्योंकि इस बार पीएसएलवी के साथ जो अन्वेषा सैटेलाइट थी, जो भारतीय सेना के लिहाज से बेहद जरूरी सैटेलाइट थी. अब वो सैटेलाइट भी नहीं रही. ऐसे में जो इसरो पीएसएलवी के जरिए दुनिया भर के देशों की सैटेलाइट अंतरिक्ष में लेकर जाता था, अब दूसरे देश अपने सैटेलाइट इसरो को सौंपने से पहले कई बार सोचेंगे. इसके अलावा इस साल इसरो के गगनयान और चंद्रयान जैसे मिशन भी हैं, जिन्हें इसरो की इस असफलता से झटका लग सकता है.
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