नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिन के इजरायल दौरे पर हैं और ऐसे में दिल्ली में बना तीनमूर्ति मार्ग भी चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल इस मार्ग का नाता इजरायल के हाइफा शहर से है, जहां पहले विश्वयुद्ध के दौरान भारत के 3 राज्यों जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर से भेजे गए सैनिकों ने ओटोमन साम्राज्य के खिलाफ युद्ध लड़ा था. यही कारण है कि इन 3 राज्यों के चलते इस मार्ग पर 3 प्रतीकात्मक मूर्तियां बनाई गई हैं जिसमें भारतीय सैनिकों के हाथ मे भाला है.
हैरानी की बात यह है कि 1918 में ओटोमन एम्पायर के पास उस वक़्त हथियार के नाम पर मशीन गन अजर तोपें थी जिसका मुकाबला हमारे जवानों ने महज घोड़े और भालों से किया था और हमारे सैनिकों की मदद से उस वक़्त फिलिस्तीन के हाइफा पर 400 साल पुराने राज को खत्म कर दिया था जिसमें कई जवानों की जान भी गई थी. हाइफा में भी 8 भारतीय जवानों की कब्र आज भी है.
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में हीब्रू के प्रोफ़ेसर खुर्शीद इमाम के मुताबिक तीनमूर्ति मार्ग का हाइफा से जो नाता है उसके बारे में बहुत कम ही लोग जानते हैं. कई लोग तो इस मार्ग को गांधी जी से जुड़ा बताते हैं लेकिन इसका बहुत बड़ा महत्व है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे पर जाते ही इस तीन मूर्ति मार्ग का नाम तीन मूर्ति हाइफा मार्ग रखने की अटकलें तेज़ हो गयी है. आपको बता दें कि इस मार्ग के नाम को बदलने पर अप्रैल में एक प्रस्ताव एनडीएमसी कॉउंसिल में रखा गया था लेकिन किसी कारणवश इसे टाल दिया गया. माना जा रहा है कि अब जब खुद पीएम मोदी इजरायल में हैं तो वो इसका नाम बदलने की घोषणा कर सकते हैं.
