भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी मंगलवार को सेवानिवृत्त हो गए. विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में सेना ने उत्तरी सीमाओं पर 'ऑपरेशन स्नो लेपर्ड' और पश्चिमी मोर्चे पर 'ऑपरेशन सिंधु' के तहत व्यापक तैयारियां की हैं. उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध संयुक्त सैन्य अभियानों पर आधारित होंगे, इसलिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट रणनीति जरूरी है.

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इस पर रक्षा विशेषज्ञ कर्नल डी.एस. चीमा (सेवानिवृत्त) ने आईएएनएस से कहा कि सेना प्रमुख के कार्यकाल के अंत में सैन्य तैयारियों की समीक्षा और जिम्मेदारियों का हस्तांतरण सामान्य प्रक्रिया है. उन्होंने बताया कि जनरल द्विवेदी ने हाल के दिनों में श्रीनगर समेत कई सीमावर्ती सैन्य ठिकानों का दौरा किया और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया. उनके अनुसार भारतीय सेना पूर्वी और पश्चिमी दोनों सीमाओं पर पूरी तरह तैयार और सतर्क है.

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सीमा पर मजबूती

कर्नल चीमा ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में सेना की क्षमताएं लगातार बढ़ी हैं. न्योमा एयरफील्ड के विकास से एलएसी के पास त्वरित तैनाती और रसद आपूर्ति मजबूत हुई है. जोजिला सुरंग पूरी तरह चालू होने के बाद लद्दाख तक सालभर निर्बाध पहुंच संभव होगी, जिससे सैनिकों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही आसान होगी.

स्वदेशी रक्षा उत्पादन

उन्होंने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयातक नहीं है. देश आधुनिक हथियार और सैन्य उपकरणों का निर्माण कर रहा है और कई देशों को उनका निर्यात भी कर रहा है. उनके अनुसार चीन या पाकिस्तान किसी भी सैन्य कार्रवाई से पहले भारतीय सेना की तैयारियों और क्षमताओं का आकलन करने को मजबूर होंगे.

बदलता युद्ध स्वरूप

कर्नल चीमा ने कहा कि भविष्य के युद्ध केवल टैंक और तोपों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि संयुक्त सैन्य अभियानों पर आधारित होंगे. भारतीय सेना नई एकीकृत सैन्य संरचनाएं विकसित कर रही है, जिनमें इन्फैंट्री, आर्मर्ड यूनिट, आर्टिलरी, एयर डिफेंस और इंजीनियरिंग संसाधनों को एक साथ जोड़कर बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा.

ड्रोन की भूमिका

कर्नल चीमा ने कहा कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन निगरानी, खुफिया जानकारी, लक्ष्य की पहचान और सटीक हमलों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है और भारत बड़े पैमाने पर ड्रोन निर्माण क्षमता विकसित कर रहा है. कर्नल चीमा ने विश्वास जताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और स्वदेशी हथियारों से लैस भारतीय सेना भविष्य की हर चुनौती का प्रभावी जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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