अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करने के लिए उद्देश्य से साल 2019 के फरवरी में एक कार्यकारी आदेश 13859 के तहत अमेरिकन एआई इनिशिएटिव की शुरुआत की थी. इस पहल की नींव इस सोच पर रखी गई थी कि एआई भविष्य में अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा. वहीं, अब एआई में निवेश को लेकर भारत में काफी चर्चाएं हो रही हैं.

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एआई को लेकर क्या है भारत की सोच?

इस बीच न्यूज एजेंसी ANI के सरकारी सूत्रों ने इस मामले में बताया है कि अमेरिका इस वक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रहा है. अमेरिका चाहता है कि AI के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले उस पर कुछ पाबंदियां लगाई जाएं, क्योंकि साइबर सिक्योरिटी जैसे कई क्षेत्रों में AI का असर बहुत गहरा हो सकता है. 

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हालांकि, सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार एआई का भारतीय मॉडल बनाने के समर्थन करती है और सरकार का कहना है कि टेक्नोलॉजी के मामले में भारत के पास रणनीतिक स्वायत्तता होनी चाहिए.

एआई को लेकर भारत सरकार क्या उठा रही कदम?

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और इंफोरमेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय (MeitY) के सचिव एस. कृष्णन ने इस संबंध में न्यूज एजेंसी एएनआई से एआई में निवेश को लेकर कहा, ‘AI में बड़े निवेश फिलहाल ताइवान, कोरिया और अमेरिका जैसे बाजारों तक ही सीमित हैं. सरकार AI के क्षेत्र में कंसंट्रेशन के जोखिमों को भी जानती है. भारत का उद्देश्य एक ऐसे देश के तौर पर बनकर उभरना है जो कई सेक्टरों में एआई के प्रभावों को पहुंचाए.’ 

वहीं, उन्होंने मेमोरी चिप की कमी को लेकर भी बड़ा बयान दिया है. केंद्रीय मंत्रालय के सचिव ने आगे कहा, ‘मेमोरी चिप्स की कीमतें समय के साथ बाजार में खुद ही संतुलित हो जाएंगी. हालांकि, चिप्स की कमी की वजह से एआई के विस्तार की रफ्तार कुछ धीमी पड़ सकती है. जबकि डिवाइस की किफायती कीमतें बाजार तय करती है और सरकार मुख्य रूप से इसकी सप्लाई को मजबूत करने का काम कर रही है.’

AI के इस्तेमाल के लिए इंसानी क्षमताओं को बेहतर करना होगा- पीके मिश्रा 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रिसिंपल सेक्रेटरी डॉ. पीके मिश्रा ने सोमवार (29 जून, 2026) को दिल्ली में न्यूज एजेंसी एएनआई से एआई के संबंध में बातचीत करते हुए कहा, ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं. यह डेटा को इस्तेमाल करने और हमारे फैसलों को और भी ज्यादा प्रभावी बनाने की दिशा में काफी मौके देता है. इसके साथ ही, हमें एआई के प्रभावी रूप से इस्तेमाल के लिए इंसानी क्षमताओं को भी बेहतर करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इसके नतीजों को सही से वैलिडेट किया जाए.’ 

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