देश में इस बार मानसून की धीमी रफ्तार का असर अब खेतों में साफ दिखाई देने लगा है. मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 1 जून से 1 जुलाई 2026 के बीच देश में सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. बारिश की इस बड़ी कमी का सीधा असर खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा है और कई प्रमुख फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले काफी कम रह गया है.

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53.74 लाख हेक्टेयर कम हुई बुवाई

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 25 जून 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई 182.72 लाख हेक्टेयर में हुई है. पिछले साल इसी तारीख तक 236.46 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी यानी इस साल अब तक 53.74 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में बुवाई हुई है जो करीब 23 फीसदी की गिरावट है. इससे साफ है कि कमजोर मानसून का असर किसानों की बुवाई पर पड़ने लगा है.

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तिलहन की बुवाई सबसे ज्यादा प्रभावित

सबसे ज्यादा असर तिलहन की फसलों पर देखने को मिला है. पिछले साल 36.41 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई थी जबकि इस साल यह घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गई है. यानी तिलहन की बुवाई में करीब 53 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है जो सभी खरीफ फसलों में सबसे बड़ी कमी है.

कपास, धान और दलहन भी पीछे

तिलहन के बाद कपास की बुवाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. कपास का रकबा 45.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 29.66 लाख हेक्टेयर रह गया है. वहीं धान की बुवाई भी पिछले साल के मुकाबले धीमी है. इस साल अब तक 25.75 लाख हेक्टेयर में धान बोया गया है जबकि पिछले साल इसी अवधि में 34.41 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी. दलहन की फसलें भी कमजोर मानसून की मार से अछूती नहीं रहीं. दलहन का रकबा 21.46 लाख हेक्टेयर से घटकर 14.92 लाख हेक्टेयर रह गया है.

श्री अन्न की बुवाई भी घटी, गन्ने में हल्की बढ़त

मोटे अनाज (श्री अन्न) की बुवाई में भी गिरावट दर्ज की गई है. इसका रकबा 36.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 31.84 लाख हेक्टेयर रह गया है. हालांकि राहत की बात यह है कि गन्ना और जूट-मेस्ता की बुवाई में पिछले साल के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

आगे क्या?

अगर जुलाई में मानसून तेजी नहीं पकड़ता है तो खरीफ फसलों की बुवाई और उत्पादन दोनों पर दबाव बढ़ सकता है. इसका असर आगे चलकर खाद्यान्न, दालों, खाद्य तेल और कपास जैसी जरूरी कृषि उपज की उपलब्धता और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.

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