नई दिल्ली: भारत और नेपाल ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘गहरा, व्यापक और बहु आयामी’ बताते हुए रेल पटरियां बिछाने और सड़कें बनाने जैसी विभिन्न संयुक्त बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में तेजी लाने का फैसला लिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर दे उबा के साथ व्यापक बातचीत की और बाद में एक संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने भारत-नेपाल संबंधों की उत्कृष्ट स्थिति पर संतुष्टि जताई. बयान में कहा गया है कि मोदी ने संविधान लागू करने में समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और नेपाल को संघीय, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने में नेपाल सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की. बयान में कहा गया है कि दोनों देश अभी चल रही दो रेल परियोजनाओं जयनगर-बिजालपुर-बर्दिबास और जोगबनी-बिराटनगर रेल संपर्क का काम जल्द पूरा करने की जरुरत को स्वीकार करते हैं. इसमें जयनगर से जनकपुर और जोगबनी से बिराटनगर कस्टम यार्ड तक रेलवे लाइन को 2018 तक पूरा किए जाने की संभावना भी जतायी गयी. इसमें यह भी कहा गया कि नेपाल दोनों परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए सभी मुद्दों को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है. बस सेवाओं के लिए, दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि सीमा पार परिवहन सुविधा पर संयुक्त कार्यकारी समूह की मुलाकात जल्द होगी ताकि मौजूदा और अतिरिक्त मार्गों से जुड़े मुद्दों को हल किया जा सके. दोनों नेताओं ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए 20 करोड़ डॉलर और सड़कों के विकास के लिए 33 करोड़ डॉलर के आवंटन का स्वागत किया. उन्होंने सुरक्षा से संबंधित मामलों पर उत्कृष्ट सहयोग पर संतुष्टि जताई. दोनों प्रधानमंत्रियों ने अपने संबंधित अधिकारियों को नेपाल में आए भूकंप के बाद पुन: निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए पशुपति क्षेत्र विकास ट्रस्ट और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के बीच समझौता ज्ञापन तैयार करने के निर्देश दिए.