चीन और पाकिस्तान के ज्वाइंट स्टेटमेंट में जम्मू कश्मीर का जिक्र आने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन यात्रा पर हैं. मंगलवार (26 मई 2026) को एक संयुक्त बयान में कहा गया है, 'पाकिस्तान ने चीन को जम्मू और कश्मीर की हालिया स्थिति बताई है. इस पर चीन ने कहा कि यह विवाद पुराना है और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण तरीके से हल किया जाना चाहिए.'

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J&K, लद्दाख भारत का अभिन्न अंग: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय ने कहा, 'जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है और हमेशा रहेगा. किसी भी दूसरे देश को इस पर टिप्पणी करने का कोई हक नहीं है. चीन और पाकिस्तान के बीच जॉइंट स्टेटमेंट में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के बेवजह जिक्र को पूरी तरह से खारिज करतें हैं.'

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भारत ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) प्रोजेक्ट्स का भी कड़ा विरोध किया. विदेश मंत्रालय ने कहा, 'इसके कुछ हिस्से भारत के संप्रभु क्षेत्र से होकर गुजरते हैं. भारत पाकिस्तान के अवैध और जबरदस्ती किए गए कब्जे को वैध बनाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं करता, क्योंकि यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है.'

ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन पर भारत का जवाब

भारत ने चीन और पाकिस्तान के बीच ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन की चर्चा को भी खारिज किया. विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हमने चीन और पाकिस्तान के बीच तथाकथित ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन का जिक्र भी देखा है. दोनों देश कोई बाउंड्री शेयर नहीं करते हैं इसलिए ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन का सवाल ही नहीं उठता. भारत ने पाकिस्तान और चीन के बीच तथाकथित 1963 के बाउंड्री एग्रीमेंट को कभी मान्यता नहीं दी है.'

राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री ली क्विंग ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से अलग-अलग मुलाकात की और दोनों पक्षों ने चीन-पाकिस्तान सर्वकालिक रणनीतिक सहयोग साझेदारी को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की. चीन ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपने अटूट समर्थन को दोहराया और पाकिस्तान द्वारा उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा, स्थिरता, विकास और समृद्धि की रक्षा के प्रयासों का दृढ़ता से समर्थन किया.

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